Delhi HC का बड़ा फैसला: मैटरनिटी लीव के बाद नहीं होगा डिमोशन, कंपनियों के लिए नई गाइडलाइंस जरूरी

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AuthorMehul Desai|Published at:
Delhi HC का बड़ा फैसला: मैटरनिटी लीव के बाद नहीं होगा डिमोशन, कंपनियों के लिए नई गाइडलाइंस जरूरी

Delhi High Court ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि मैटरनिटी लीव (Maternity Leave) लेने वाली महिला कर्मचारियों को काम पर लौटने के बाद डिमोट नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि डिमोशन का मतलब सिर्फ सैलरी में कटौती नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और रोल में बदलाव भी है।

फैसले का आधार

दिल्ली हाईकोर्ट ने Rakhi Bisht v. Union of India मामले में 31 अगस्त, 2026 को यह अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने साफ किया कि मैटरनिटी लीव के बाद महिला कर्मचारी को सिर्फ पुरानी सैलरी ही नहीं, बल्कि उसके पहले के सभी अधिकार, रिपोर्टिंग लाइन और जिम्मेदारियां वापस देनी होंगी। इस मामले में, पिटीशनर को मैनेजर के पद से हटाकर क्लर्क स्तर की जिम्मेदारी दी गई थी, जिसे कोर्ट ने नियमों का उल्लंघन माना। इसके लिए कोर्ट ने ₹10 लाख का मुआवजा और ₹1.5 लाख का खर्च देने का आदेश दिया है।

कंपनियों के लिए क्या हैं खतरे?

यह फैसला अब कॉरपोरेट जगत के लिए एक बड़ी कानूनी चुनौती बन गया है। अब कंपनियों को यह साबित करना होगा कि अगर वे रोल में कोई बदलाव कर रही हैं, तो वह किसी भेदभाव के कारण नहीं बल्कि वैध व्यावसायिक कारणों से है। जिन कंपनियों में महिला कर्मचारियों को वापस लौटने पर डिसीजन-मेकिंग पावर से दूर किया जाता था, उनके लिए अब कानूनी खतरा बढ़ गया है।

सरकार के नए नियम

कोर्ट ने केंद्र सरकार को अगले 6 महीनों के भीतर मैटरनिटी लीव के बाद कर्मचारियों के रिइंटीग्रेशन (Reintegration) के लिए व्यापक नियम बनाने का निर्देश दिया है। अब HR पॉलिसी में बदलाव करना कंपनियों के लिए अनिवार्य होगा। निवेशकों को भी कंपनियों की इन नीतियों पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि नियमों के उल्लंघन से न केवल कानूनी जुर्माना बल्कि कंपनी की साख (Reputation) पर भी बुरा असर पड़ सकता है। इसे Maternity Benefit Act, 1961 और Code on Social Security, 2020 के दायरे में और अधिक मजबूती से लागू किया जाएगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.