Delhi High Court ने पूर्व जज यशवंत वर्मा से जुड़े कैश स्कैंडल की CBI जांच की मांग को ठुकरा दिया है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने सही कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया है और सीधे जांच एजेंसी के पास पहुंच गए।
दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस अमित बंसल ने इस मामले में अहम फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया कि किसी भी जांच के लिए याचिकाकर्ता को सबसे पहले स्थानीय पुलिस या सक्षम मजिस्ट्रेट के पास जाना चाहिए। कोर्ट ने इस याचिका को 'वाइल्ड विच हंट' (Wild Witch Hunt) करार देते हुए कहा कि कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार करना स्वीकार्य नहीं है। इससे पहले अगस्त में सुप्रीम कोर्ट भी इसी तरह की एक याचिका को खारिज कर चुका है।
क्या है पूरा विवाद?
यह मामला मार्च 2025 का है, जब लुटियंस दिल्ली में स्थित यशवंत वर्मा के घर में आग लगी थी। राहत और बचाव कार्य के दौरान वहां भारी मात्रा में नकदी (Cash) बरामद हुई थी, जिसने पूरे न्यायिक तंत्र को हिलाकर रख दिया था। इस खुलासे के बाद उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया और 9 अप्रैल 2025 को उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
संसद में भी गूंजा था मामला
इस्तीफे से पहले इस मुद्दे पर संसद में महाभियोग (Impeachment) की कार्यवाही शुरू हुई थी। संसदीय जांच में यह पाया गया था कि पूर्व जज के खिलाफ लगे आरोप पुख्ता हैं, जिसमें बिना हिसाब वाली नकदी और सबूतों के साथ छेड़छाड़ की चिंताएं शामिल थीं। हालांकि, इस्तीफा देने के बाद लोकसभा में उनके खिलाफ चल रही हटाने की प्रक्रिया को बंद कर दिया गया था। कोर्ट का यह ताजा रुख यह स्पष्ट करता है कि भारत की न्याय प्रणाली में जांच के लिए उचित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।
