Supertech: दिल्ली हाई कोर्ट का झटका, 'Hill Town' प्रोजेक्ट पर जारी रहेंगे क्रिमिनल केस

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AuthorMehul Desai|Published at:
Supertech: दिल्ली हाई कोर्ट का झटका, 'Hill Town' प्रोजेक्ट पर जारी रहेंगे क्रिमिनल केस

Delhi High Court ने Supertech के मैनेजमेंट की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें सोहना के 'Hill Town' प्रोजेक्ट से जुड़े क्रिमिनल केस को खत्म करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने माना कि फंड के हेरफेर और विश्वासघात के आरोपों की पूरी सुनवाई जरूरी है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने Supertech Limited के चेयरमैन राम किशोर अरोड़ा और अन्य अधिकारियों की उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें सोहना (हरियाणा) के 'Hill Town' रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट से जुड़े आपराधिक मामलों को रद्द करने की अपील की गई थी। जस्टिस मधु जैन ने निचली अदालत के 2025 के आदेश को बरकरार रखते हुए साफ कर दिया कि कंपनी पर लगे धोखाधड़ी, विश्वासघात और आपराधिक साजिश के आरोपों की पूरी ट्रायल होगी।

कोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला सिर्फ पजेशन में देरी का नहीं है, बल्कि होमबायर्स से लिए गए फंड के मैनेजमेंट और उसके इस्तेमाल पर गंभीर सवाल खड़े करता है। कोर्ट के मुताबिक, इस मामले में प्रथम दृष्टया केस बनता है, जिसे केवल कानूनी दांव-पेच से खत्म नहीं किया जा सकता। यह फैसला उन रियल एस्टेट कंपनियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो कांट्रेक्चुअल एग्रीमेंट की आड़ में वित्तीय गड़बड़ियों से बचना चाहती हैं।

दिवालिया प्रक्रिया और प्रोजेक्ट्स पर दबाव

Supertech वर्तमान में इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रक्रिया से गुजर रही है। इस कानूनी पचड़े के कारण कंपनी के मैनेजमेंट पर काम का दबाव और बढ़ गया है। फिलहाल, NCLAT ने सरकारी कंस्ट्रक्शन कंपनी NBCC को Supertech के 16 अटके हुए प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की जिम्मेदारी सौंपी है।

निवेशकों और घर खरीदारों के लिए यह एक बड़ी अनिश्चितता का समय है। अब सबकी नजरें NCLAT की अगली सुनवाई पर हैं, जहां इन 16 प्रोजेक्ट्स के कंस्ट्रक्शन स्टेटस और प्रोग्रेस रिपोर्ट पर चर्चा होगी। देखना यह होगा कि कंपनी की यह कानूनी लड़ाई प्रोजेक्ट्स की डेडलाइन को और कितना प्रभावित करती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.