Delhi HC Denies Bail to Ex-MLA Naresh Balyan in MCOCA Case

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AuthorMehul Desai|Published at:
Delhi HC Denies Bail to Ex-MLA Naresh Balyan in MCOCA Case

दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्व AAP विधायक नरेश बालियान की जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह मामला महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) के तहत दर्ज है। बालियान पर एक संगठित अपराध सिंडिकेट को सुविधा देने का आरोप है, जिसे उन्होंने खारिज किया था। इस फैसले के बाद, बालियान को हिरासत में रहना होगा, जबकि जबरन वसूली और आपराधिक सिंडिकेट से जुड़े आरोपों पर कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ेगी।

MCOCA केस में पूर्व MLA नरेश बालियान को नहीं मिली ज़मानत

दिल्ली हाई कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व विधायक नरेश बालियान को ज़मानत देने से साफ इंकार कर दिया है। यह मामला महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) के तहत दर्ज किया गया है, जो विशेष रूप से संगठित आपराधिक गतिविधियों से निपटने के लिए बनाया गया कानून है। कोर्ट के इस फैसले के बाद, बालियान न्यायिक हिरासत में ही रहेंगे और मामले की सुनवाई आगे जारी रहेगी।

क्या हैं आरोप?

पूर्व MLA पर लगे आरोपों में सबसे अहम है कि वे एक संगठित अपराध सिंडिकेट के सूत्रधार (facilitator) के तौर पर काम कर रहे थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस सिंडिकेट का सरगना गैंगस्टर कपिल सांगवान है, जिसे 'नंदू' के नाम से भी जाना जाता है। अधिकारियों ने बालियान पर सिंडिकेट के संचालन में शामिल होने का आरोप लगाया है, जिसमें राज्य के अनुसार, संगठित जबरन वसूली (organized extortion) और अवैध रूप से संपत्ति जमा करना शामिल है। बता दें कि इससे पहले जनवरी 2025 में एक ट्रायल कोर्ट ने भी उनकी ज़मानत याचिका खारिज कर दी थी।

मामले की शुरुआत कैसे हुई?

यह कानूनी कार्रवाई तब तेज हुई जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक ऑडियो रिकॉर्डिंग पेश की। पार्टी का आरोप था कि इस रिकॉर्डिंग में बालियान और फरार गैंगस्टर नंदू के बीच बातचीत है। बीजेपी के अनुसार, इस बातचीत में पूर्व विधायक गैंगस्टर को एक स्थानीय बिल्डर को धमकाने और उससे जबरन वसूली करने का निर्देश दे रहे थे। वित्तीय अनियमितताओं और आपराधिक मिलीभगत के इन दावों ने कोर्ट में अभियोजन पक्ष की दलील का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है।

कोर्ट में क्या हुआ और आगे क्या?

ज़मानत सुनवाई के दौरान, बालियान के वकीलों ने दलील दी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं और उन्हें साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। वहीं, दूसरी ओर अभियोजन पक्ष ने कथित सिंडिकेट के सदस्यों के खिलाफ दर्ज की गई कई फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट्स (FIRs) का हवाला देकर समूह के संचालन की प्रकृति और जनता की सुरक्षा पर इसके प्रभाव को उजागर किया। कोर्ट के इस फैसले ने प्रभावी रूप से बालियान को हिरासत में रखा है, जबकि जांच और मुकदमे की प्रक्रिया जारी रहेगी। सुनवाई के अगले चरणों में अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए सबूतों की वैधता और कथित आपराधिक संबंधों के संबंध में बचाव पक्ष के प्रति-तर्कों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

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