दिल्ली हाई कोर्ट ने Nehru Place District Centre से सभी अनधिकृत फेरीवालों को हटाने का सख्त आदेश दिया है। यह नियम **12 अक्टूबर 2026** से प्रभावी होगा, जिसका मुख्य उद्देश्य अतिक्रमण को हटाना और फायर सेफ्टी मानकों में सुधार करना है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने राजधानी के सबसे व्यस्त कमर्शियल हब में से एक, Nehru Place को आधिकारिक तौर पर 'नो-वेंडिंग और नो-हॉकिंग' जोन घोषित कर दिया है। इस कानूनी निर्देश के तहत Municipal Corporation of Delhi (MCD) को 12 अक्टूबर 2026 से अनाधिकृत वेंडर्स के खिलाफ बेदखली की कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया गया है।
रिहैबिलिटेशन और प्रक्रिया
प्रशासन ने बदलाव को सुगम बनाने के लिए 90 सत्यापित विक्रेताओं को एक वैकल्पिक स्थान पर शिफ्ट करने की अनुमति दी है। इसके साथ ही, नई बनी Town Vending Committee (TVC)-II अगले 2 महीनों तक इन विक्रेताओं के दस्तावेजों की समीक्षा करेगी ताकि उन्हें औपचारिक वेंडिंग सर्टिफिकेट दिए जा सकें। यह कदम Street Vendors Act के नियमों का पालन करते हुए कॉम्प्लेक्स को खाली कराने की रणनीति का हिस्सा है।
फायर सेफ्टी ऑडिट पर नजर
इलाका खाली होते ही Delhi Fire Services द्वारा पूरे कमर्शियल जिले का विस्तृत फायर सेफ्टी ऑडिट किया जाएगा। पिछले काफी समय से स्टॉल्स के अनियोजित लेआउट और रास्तों पर अवैध कब्जे के कारण आग लगने का खतरा बना हुआ था। इस ऑडिट की रिपोर्ट सीधे कोर्ट में पेश की जाएगी, जिससे नियमों के उल्लंघन पर लगाम कसी जा सके।
सरकारी एजेंसियों का तालमेल
इस पूरी कार्रवाई को अंजाम देने के लिए Delhi Police, MCD और Delhi Development Authority (DDA) मिलकर काम करेंगे। यह मामला 2009 के एक पुराने निर्देश से जुड़ा है, जहाँ करीब 400 से अधिक अनधिकृत वेंडर्स की मौजूदगी एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी। अब देखना यह है कि 12 अक्टूबर के बाद प्रशासन भविष्य में फिर से अतिक्रमण रोकने में कितना कामयाब रहता है।
