Delhi Gymkhana Club Case: जज ने खुद को केस से किया अलग, अब क्या होगा 27.3 एकड़ जमीन का भविष्य?

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AuthorAditya Rao|Published at:
Delhi Gymkhana Club Case: जज ने खुद को केस से किया अलग, अब क्या होगा 27.3 एकड़ जमीन का भविष्य?

Delhi Gymkhana Club के विवाद में एक नया मोड़ आया है। दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस प्रतीक जालान ने निजी कारणों से इस केस की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। यह मामला सफदरजंग रोड पर स्थित क्लब की **27.3 एकड़** जमीन को सरकार द्वारा वापस लेने से जुड़ा है।

जज का फैसला

बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस प्रतीक जालान ने दिल्ली जिमखाना क्लब से जुड़े मामले की सुनवाई से अपना नाम वापस ले लिया है। जज ने स्पष्ट किया है कि चूंकि वे खुद इस क्लब के सदस्य हैं, इसलिए वे इस मामले में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सुनवाई नहीं करेंगे। अब यह मामला किसी दूसरी बेंच के पास भेजा जाएगा।

क्या है विवाद की जड़?

यह सारा कानूनी टकराव 22 मई 2026 को लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) द्वारा जारी उस नोटिस के बाद शुरू हुआ, जिसमें क्लब की 27.3 एकड़ जमीन का लीज रद्द करने की बात कही गई थी। सरकार का तर्क है कि यह जमीन सार्वजनिक हित और रक्षा से जुड़ी बुनियादी जरूरतों के लिए आवश्यक है।

सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप

मामले में नया मोड़ 5 अक्टूबर 2026 को आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने 11 क्लब सदस्यों को सरकार के बेदखली प्रयासों को स्वतंत्र रूप से चुनौती देने की अनुमति दी। कोर्ट ने माना कि सरकारी नॉमिनी वाली मैनेजमेंट कमेटी सरकार के खिलाफ प्रभावी ढंग से नहीं लड़ सकती थी।

आगे की राह

अभी क्लब के सदस्य और स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन कोर्ट के जरिए इस बेदखली को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार की कार्रवाई में कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं हुआ है। हालांकि केंद्र सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि जब तक मामला 'सब-जुडिस' (न्यायाधीन) है, तब तक कोई जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी।

नोट: यह क्लब एक प्राइवेट संस्था है और शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है, इसलिए इस कानूनी लड़ाई का असर स्टॉक मार्केट पर नहीं पड़ेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.