दिल्ली सरकार के एडिशनल स्टैंडिंग काउंसिल अमोल सिन्हा ने Cockroach Janta Party की लीगल हेड रत्ना सिंह के खिलाफ क्रिमिनल कॉन्टेम्प्ट कार्यवाही शुरू करने की मंजूरी दे दी है। यह मामला साकेत कोर्ट के एक मजिस्ट्रेट की स्वतंत्रता पर सवाल उठाने वाली सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा है।
दिल्ली सरकार के एडिशनल स्टैंडिंग काउंसिल (क्रिमिनल) अमोल सिन्हा ने Cockroach Janta Party की लीगल हेड रत्ना सिंह के खिलाफ औपचारिक रूप से क्रिमिनल कॉन्टेम्प्ट ऑफ कोर्ट की कार्यवाही शुरू करने की सहमति दे दी है। यह फैसला एडवोकेट कौशिक चटर्जी की उस याचिका के बाद लिया गया है, जिसमें सिंह की सार्वजनिक टिप्पणियों पर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी।
विवाद की जड़ क्या है?
यह पूरा विवाद प्लेटफॉर्म 'X' पर की गई पोस्ट से जुड़ा है। इन पोस्ट्स में साकेत कोर्ट के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अभिनव पांडे को निशाना बनाया गया था, जिन्होंने पहले रत्ना सिंह की हिरासत से संबंधित मामलों की सुनवाई की थी। सिंह ने आरोप लगाया था कि मजिस्ट्रेट अपनी न्यायिक स्वतंत्रता के बजाय बाहरी दबाव में काम कर रहे थे।
अमोल सिन्हा की कानूनी राय
2 नवंबर, 2026 को जारी अपनी कानूनी राय में अमोल सिन्हा ने स्पष्ट किया कि हालांकि अदालती आदेशों की आलोचना करना एक अधिकार है, लेकिन इस मामले में भाषा की मर्यादा लांघी गई है। उन्होंने माना कि मजिस्ट्रेट को 'बाहरी इशारों' पर काम करने वाला बताना न्यायपालिका की गरिमा और निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है।
आगे की प्रक्रिया
यह अनुमति 'कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट, 1971' की धारा 15(2) के तहत दी गई है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह कोई अंतिम सजा या दोषी करार देने का आदेश नहीं है। अब दिल्ली हाईकोर्ट यह तय करेगा कि क्या सिंह के कार्य क्रिमिनल कॉन्टेम्प्ट के दायरे में आते हैं।
नोट: यह मामला पूरी तरह से कानूनी और प्रशासनिक है। चूंकि रत्ना सिंह या Cockroach Janta Party का किसी लिस्टेड कंपनी से संबंध नहीं है, इसलिए इसका शेयर बाजार या निवेश पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
