यूट्यूबर Ajeet Bharti के लिए मुसीबतें बढ़ गई हैं। दिल्ली की अदालत ने SC/ST एक्ट से जुड़े एक मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। यह विवाद नगीना के सांसद Chandrashekhar Azad पर की गई टिप्पणियों के बाद खड़ा हुआ है।
दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 7 सितंबर 2026 को यूट्यूबर और एक्टिविस्ट Ajeet Bharti की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। यह मामला अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज किया गया है, जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की धाराएं भी शामिल हैं।
मामले की जड़
यह विवाद 23 अगस्त 2026 को नॉर्थ एवेन्यू पुलिस स्टेशन में दर्ज एक एफआईआर से शुरू हुआ। आजाद समाज पार्टी (कांशी राम) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बालकराम बौद्ध ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि Ajeet Bharti ने एक यूट्यूब लाइवस्ट्रीम के दौरान नगीना से सांसद Chandrashekhar Azad के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी, जो विशिष्ट समुदायों के प्रति भी आपत्तिजनक थी।
कोर्ट का रुख
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि टिप्पणियों की प्रकृति प्रथम दृष्टया जाति आधारित पदानुक्रम और सामाजिक स्थिति को छूती है, जिसके कारण SC/ST एक्ट लागू होता है। अधिनियम की धारा 18 के तहत, ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत पर वैधानिक रोक है। इसी आधार पर कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया।
ट्रायल कोर्ट के आदेश के बाद, Ajeet Bharti ने अब दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दायर की है। कानूनी जानकारों का मानना है कि यह केस ऑनलाइन कंटेंट, राजनीतिक अभिव्यक्ति और जाति आधारित उत्पीड़न के खिलाफ सुरक्षा के बीच के नाजुक संतुलन को रेखांकित करता है।
