दिल्ली की स्पेशल NIA कोर्ट ने टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुनवाई की नई तारीख का ऐलान कर दिया है। **19 नवंबर 2026** से अभियोजन पक्ष (Prosecution) सबूत पेश करना शुरू करेगा, जिसमें अलगाववादी नेता Yasin Malik और Baramulla के सांसद Sheikh Abdul Rashid मुख्य रूप से शामिल हैं।
दिल्ली की विशेष NIA अदालत ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए 19 नवंबर 2026 से गवाहों और सबूतों को दर्ज करने का निर्देश दिया है। यह मामला साल 2017 से चल रही एक लंबी जांच का हिस्सा है, जिसमें अब कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत 7 लोगों पर आरोप तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
जांच एजेंसियों का आरोप है कि जम्मू-कश्मीर में अस्थिरता फैलाने के लिए एक जटिल फाइनेंशियल नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया था। फाइलिंग के अनुसार, करीब ₹8.95 करोड़ की अवैध राशि हवाला चैनल और कैश कूरियर के जरिए पहुंचाई गई थी। आरोप है कि यह पैसा नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग से आता था, जिसे बाद में हुर्रियत नेताओं तक पहुंचाया जाता था। यह फंड कथित तौर पर Jammu and Kashmir Liberation Front (JKLF) को समर्थन देने के लिए जुटाया गया था।
कानूनी पेचीदगियां
सितंबर में अदालत के आदेश के बाद अब यह केस औपचारिक ट्रायल की ओर बढ़ चुका है। आरोपी न केवल मनी लॉन्ड्रिंग बल्कि Unlawful Activities Prevention Act (UAPA) के तहत भी गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर आपराधिक साजिश और आतंकी गतिविधियों से जुड़ा है।
तिहाड़ जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई हालिया सुनवाई में Yasin Malik ने खुद को निर्दोष बताते हुए केस लड़ने का फैसला किया है। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि सरकारी वकील अदालत में किस तरह के फाइनेंशियल रिकॉर्ड और गवाह पेश करेंगे, जो इस जटिल केस में वित्तीय लेनदेन की परतें खोलेंगे।
