Cornell University और Chi Phi फ्रेटर्निटी के सदस्यों के खिलाफ एक पूर्व छात्रा ने सिविल मुकदमा दायर किया है। यह मामला अक्टूबर 2024 में हुए कथित यौन हमले और यूनिवर्सिटी की अनुशासनात्मक कार्रवाई में बरती गई लापरवाही से जुड़ा है।
एक पूर्व छात्रा ने Cornell University और Chi Phi फ्रेटर्निटी के 7 सदस्यों के खिलाफ सिविल कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया है। यह कानूनी कार्रवाई उस मामले को फिर से सुर्खियों में ले आई है, जो पहले क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में सबूतों की कमी के चलते ठंडे बस्ते में चला गया था। शिकायत के अनुसार, यह घटना 19 अक्टूबर, 2024 को इथाका कैंपस में हुई थी। पीड़िता का आरोप है कि उसे केटामाइन देकर फ्रेटर्निटी हाउस में यौन शोषण का शिकार बनाया गया।
अनुशासन पर सवाल
मुकदमे का मुख्य केंद्र यूनिवर्सिटी द्वारा की गई आंतरिक जांच है। पीड़िता का दावा है कि यूनिवर्सिटी की अनुशासनात्मक प्रक्रिया पक्षपाती थी। आरोप है कि घटना में शामिल केवल 2 छात्रों को निष्कासित (expelled) किया गया, जबकि अन्य को केवल सस्पेंशन या अनिवार्य वर्कशॉप जैसी हल्की सजा दी गई। यूनिवर्सिटी ने अपने बचाव में कहा है कि उन्होंने 'Office of Student Conduct and Community Standards' की नीतियों का पालन किया है, लेकिन गोपनीयता कानूनों का हवाला देते हुए विशिष्ट रिकॉर्ड पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
क्रिमिनल केस में क्या हुआ था?
इससे पहले, Tompkins County के डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी कार्यालय ने Cornell University Police Department द्वारा जुटाए गए सबूतों की जांच की थी। हालांकि, पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण अधिकारियों ने आपराधिक आरोप (criminal charges) दायर करने से मना कर दिया था। अब इस सिविल मुकदमे के जरिए पीड़िता क्षतिपूर्ति और दंडात्मक हर्जाने की मांग कर रही है।
यूनिवर्सिटी ने इस घटना के बाद एक नई टास्क फोर्स का गठन किया है और सुरक्षा प्रोटोकॉल में बदलाव का दावा किया है। अब निवेशकों और शिक्षा जगत की नजरें इस पर टिकी हैं कि कोर्ट यूनिवर्सिटी की 'ड्यूटी ऑफ केयर' (duty of care) और उसके अनुशासनात्मक तंत्र की प्रभावशीलता पर क्या फैसला सुनाता है।
