केरल कांग्रेस यूनिट ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) Surya Kant से इस्तीफे की मांग करने वाली एक सोशल मीडिया पोस्ट को हटा दिया है। दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों पर CJI की टिप्पणी के बाद यह विवाद खड़ा हुआ था, जिस पर अब BJP ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है।
इंडियन नेशनल कांग्रेस की केरल यूनिट ने उस सोशल मीडिया पोस्ट को हटा लिया है जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) Surya Kant के पद पर सवाल उठाए गए थे। पोस्ट में दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों पर CJI की हालिया टिप्पणियों का हवाला देते हुए उनके इस्तीफे की मांग की गई थी। पोस्ट डिलीट करने के बाद पार्टी नेतृत्व ने मामले से दूरी बनाते हुए न्यायपालिका के प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया है।
विवाद की जड़ क्या है?
यह विवाद CJI के उस बयान से शुरू हुआ जिसमें उन्होंने कहा था कि दिल्ली के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े कानून-व्यवस्था के मुद्दे एक प्रशासनिक मामला हैं, न कि न्यायिक। यह स्टैंड विपक्षी INDIA ब्लॉक के उस रुख से बिल्कुल अलग है, जो चुनावी रोल संशोधन से जुड़े आरोपों पर लगातार न्यायिक हस्तक्षेप की मांग कर रहा है।
राजनीतिक बयानबाजी
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने कांग्रेस की इस पोस्ट की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे संवैधानिक संस्थाओं में विश्वास को कमजोर करने की एक सोची-समझी कोशिश करार दिया है। वहीं, कांग्रेस ने अपने रुख का बचाव करते हुए स्पष्ट किया है कि वे न्यायपालिका की स्वतंत्रता में पूरा भरोसा रखते हैं।
आगे क्या?
यह घटना भारतीय राजनीति और न्यायपालिका के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाती है। सत्ता के पृथक्करण (Separation of powers) के सिद्धांत पर बहस अब तेज हो गई है, विशेषकर ऐसे समय में जब सुप्रीम कोर्ट चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े कई अहम मामलों की सुनवाई कर रहा है। निवेशकों और जानकारों के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण है, क्योंकि संस्थागत स्थिरता सीधे तौर पर पॉलिसी और रेगुलेटरी माहौल को प्रभावित करती है।
