Chhattisgarh High Court का बड़ा फैसला: बैंक जॉब में विवाहित बेटियों के साथ भेदभाव नहीं

LAWCOURT
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
Chhattisgarh High Court का बड़ा फैसला: बैंक जॉब में विवाहित बेटियों के साथ भेदभाव नहीं

Chhattisgarh High Court ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि विवाहित होने के आधार पर बेटियों को अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) से वंचित नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने Chhattisgarh Rajya Gramin Bank को दो आवेदकों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के आदेश दिए हैं।

समानता का अधिकार और कानूनी निर्देश

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया है कि अनुकंपा नियुक्ति में विवाहित बेटे और विवाहित बेटी के बीच अंतर करना संविधान के आर्टिकल 14 और 15 का उल्लंघन है। अदालत ने माना कि वैवाहिक स्थिति किसी बेटी की निर्भरता (Dependency) को खत्म नहीं करती है।

क्या था मामला?

यह मामला शीना डेविड और अंकिता मिश्रा नाम की दो महिलाओं से जुड़ा था, जिनके पिता बैंक में कार्यरत थे और उनके निधन के बाद उन्होंने नौकरी के लिए आवेदन किया था। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक ने उनकी वैवाहिक स्थिति का हवाला देते हुए आवेदन खारिज कर दिए थे, जिसे कोर्ट ने 'मनमाना' और 'कानूनी रूप से गलत' करार दिया है।

सरकारी संस्थानों के लिए क्या है संकेत?

यह फैसला अन्य रीजनल रूरल बैंक्स (RRB) और पब्लिक सेक्टर के संस्थानों के लिए एक नजीर बन गया है। कोर्ट ने बैंक को 90 दिनों के भीतर अपनी पॉलिसी को सुधारने और आवेदनों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। अब भविष्य में यदि कोई भी सरकारी संस्थान विवाहित बेटियों के साथ भेदभाव करता है, तो उसे कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.