Central Vista Project: Krishi Bhawan से Qadeemi Masjid हटाने के लिए सरकार पहुंची हाईकोर्ट

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AuthorNeha Patil|Published at:
Central Vista Project: Krishi Bhawan से Qadeemi Masjid हटाने के लिए सरकार पहुंची हाईकोर्ट

केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर Krishi Bhawan परिसर से Qadeemi Masjid को हटाने की मांग की है। सरकार का तर्क है कि **1940** का समझौता मालिकाना हक नहीं देता, वहीं मस्जिद कमेटी ने इसे संवैधानिक अधिकारों से जोड़ा है। अगली सुनवाई **23 नवंबर, 2026** को तय की गई है।

केंद्र सरकार ने नई दिल्ली के Krishi Bhawan परिसर में स्थित ऐतिहासिक Qadeemi Masjid को हटाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यह कदम महत्वाकांक्षी Central Vista पुनर्विकास परियोजना का हिस्सा है, जिसके तहत सरकार वहां Common Central Secretariat (CCS) की 4 और 5 नंबर की इमारतें बनाने की योजना बना रही है।

मालिकाना हक को लेकर कानूनी विवाद

इस मामले में सबसे बड़ा पेंच 1940 के एक पुराने समझौते को लेकर है। सरकार का पक्ष रखते हुए वकीलों ने तर्क दिया कि उस समय मस्जिद कमेटी के साथ जो समझौता हुआ था, वह केवल धार्मिक गतिविधियों के लिए 'अनुमति' (Permissive Possession) थी, न कि जमीन पर स्थायी मालिकाना हक। सरकार का कहना है कि एक सक्रिय प्रशासनिक परिसर के भीतर किसी धार्मिक ढांचे का होना सरकारी संपत्ति के सेक्युलर चरित्र के अनुकूल नहीं है।

दूसरी ओर, मस्जिद कमेटी ने सरकार के दावों को सिरे से खारिज किया है। कमेटी का कहना है कि यह मस्जिद 1950 और 1960 के दशक में Krishi Bhawan के निर्माण से भी पुरानी है। उन्होंने अपने दावों के समर्थन में दिल्ली वक्फ बोर्ड की 1970 की अधिसूचना और ऐतिहासिक रिकॉर्ड का हवाला दिया है। साथ ही, कमेटी ने संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मिले धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का भी मुद्दा उठाया है।

प्रोजेक्ट की टाइमलाइन पर असर

यह मामला बड़े पैमाने पर चल रहे बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट्स में आने वाली चुनौतियों को दर्शाता है। Central Vista एक राष्ट्रीय महत्व की परियोजना है, और भूमि विवाद या कानूनी पेच किसी भी देरी का कारण बन सकते हैं। दिल्ली हाईकोर्ट अब इस बात की जांच कर रहा है कि सरकारी परिसरों के भीतर प्रार्थना स्थलों के नियम क्या हैं। इस मामले में अगली सुनवाई 23 नवंबर, 2026 के लिए निर्धारित की गई है। यदि अदालत का फैसला सरकार के पक्ष में आता है, तो निर्माण कार्य का रास्ता साफ हो जाएगा, वहीं किसी भी तरह की कानूनी देरी से प्रोजेक्ट की रूपरेखा और समयसीमा पर असर पड़ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.