केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर 2026 CAPF Act का बचाव किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि IPS अधिकारियों के डेपुटेशन पदों से जुड़े नियम किसी न्यायिक आदेश को दरकिनार करने के लिए नहीं, बल्कि नीतिगत सुधार के तहत बनाए गए हैं।
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक औपचारिक हलफनामा पेश कर Central Armed Police Forces (CAPF) Act, 2026 की वैधता का समर्थन किया है। यह कानूनी लड़ाई पैरामिलेट्री फोर्सेज के उन कैडर अधिकारियों द्वारा छेड़ी गई है, जिनका तर्क है कि मौजूदा डेपुटेशन नियम उनके प्रमोशन के अवसरों को बाधित कर रहे हैं।
सरकारी नीति का पक्ष
यह पूरा विवाद कैडर अधिकारियों और Indian Police Service (IPS) कर्मियों के बीच शक्ति संतुलन को लेकर है। याचिकाकर्ताओं, जिनमें CRPF के असिस्टेंट कमांडेंट बिभोर कुमार सिंह भी शामिल हैं, ने आरोप लगाया है कि 2026 Act को विशेष रूप से मई 2025 के सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को बायपास करने के लिए लाया गया था, जिसमें IPS अधिकारियों की मौजूदगी कम करने का सुझाव दिया गया था।
गृह मंत्रालय और कार्मिक विभाग का कहना है कि न्यायपालिका को नीतिगत मामलों में संयम बरतना चाहिए। केंद्र का तर्क है कि IPS अधिकारी आंतरिक सुरक्षा और प्रशासनिक समन्वय में जो विशेषज्ञता लाते हैं, वह CRPF, BSF, CISF, ITBP और Sashastra Seema Bal जैसे पांच प्रमुख बलों के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रमोशन और पदों का गणित
सरकार ने अदालत में आंकड़ों के जरिए अपनी बात रखी है। वर्तमान में, Deputy Inspector General (DIG) के कुल 607 स्वीकृत पदों में से 469 पद कैडर अधिकारियों के लिए आरक्षित हैं, जबकि 120 पद IPS डेपुटेशन के लिए हैं। सरकार का दावा है कि 2026 Act इन नियुक्तियों को कानूनी आधार प्रदान करता है और किसी भी कर्मचारी के पास संगठन की संरचना बदलने का अधिकार नहीं है।
अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि सुप्रीम कोर्ट सरकार के कार्यकारी अधिकार और कैडर अधिकारियों की करियर संबंधी चिंताओं के बीच संतुलन कैसे बैठाता है।
