कलकत्ता हाई कोर्ट ने मस्जिद से लाउडस्पीकर हटाने के पुलिस के कथित निर्देशों के खिलाफ दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि याचिका में पर्याप्त सबूत नहीं हैं। पश्चिम बंगाल सरकार ने बताया कि ध्वनि प्रदूषण नियमों के एकसमान प्रवर्तन के तहत मस्जिदों और मंदिरों सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों से **5,299** लाउडस्पीकर हटाए गए हैं।
कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?
पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा कथित तौर पर मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के मौखिक निर्देशों को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका (PIL) पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने 18 अगस्त, 2026 को सुनवाई की। एक्टिंग चीफ जस्टिस तापब्रत चक्रवर्ती और जस्टिस आरूप बनर्जी की डिविजन बेंच ने याचिका को अस्पष्ट, अप्रमाणित और अपर्याप्त सबूतों वाला करार देते हुए खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने पुलिस से ऐसे किसी भी निर्देश के समर्थन में कोई विशिष्ट लिखित आदेश पेश नहीं किया।
'बिना सबूतों के दावे' कोर्ट ने ठुकराए
कानूनी कार्यवाही के दौरान, आरोपों में दस्तावेजी सबूतों की कमी साफ दिखी। पश्चिम बंगाल सरकार ने औपचारिक रूप से ऐसे किसी भी मौखिक निर्देश जारी करने से इनकार किया। अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि लाउडस्पीकर के उपयोग के संबंध में उनकी कार्रवाई किसी एक समुदाय को लक्षित नहीं करती, बल्कि यह सार्वजनिक ध्वनि स्तरों के प्रबंधन के व्यापक प्रशासनिक प्रयास का हिस्सा है।
ध्वनि प्रदूषण नियमों का एकसमान लागू होना
सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार ने अपने प्रवर्तन के दायरे को स्पष्ट करने के लिए डेटा प्रस्तुत किया। अधिकारियों ने बताया कि अब तक राज्य भर में धार्मिक स्थलों से कुल 5,299 लाउडस्पीकर हटाए गए हैं। इनमें मस्जिदों से 4,203 और मंदिरों से 1,096 लाउडस्पीकर शामिल हैं। सरकार का कहना है कि ये कदम 2020 के एक अदालत के निर्देश के अनुसार, सभी धार्मिक और सामाजिक स्थलों पर एकसमान अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा ध्वनि प्रदूषण मानदंडों को लगातार लागू करने के लिए उठाए जा रहे हैं।
यह मामला सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण नियमों के कार्यान्वयन से संबंधित एक प्रशासनिक और कानूनी मुद्दा है। इसका सूचीबद्ध कंपनियों के वित्तीय संचालन या शेयर प्रदर्शन पर कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ता है। क्षेत्रीय नियामक परिदृश्य पर नज़र रखने वालों के लिए, मुख्य बात यह है कि राज्य के सभी धार्मिक प्रतिष्ठानों में डेसिबल सीमा और ध्वनि प्रदूषण नियमों को लागू करने पर प्रशासनिक ध्यान बना हुआ है।
