Calcutta HC और ECI: उपचुनावों में सिंबल अलॉटमेंट को लेकर हाईकोर्ट ने उठाए तीखे सवाल

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AuthorMehul Desai|Published at:
Calcutta HC और ECI: उपचुनावों में सिंबल अलॉटमेंट को लेकर हाईकोर्ट ने उठाए तीखे सवाल

West Bengal के उपचुनावों के लिए चुनाव आयोग (ECI) द्वारा 'लिफाफा' (envelope) सिंबल आवंटित करने पर Calcutta High Court ने सवाल खड़े किए हैं। कोर्ट का कहना है कि यह सिंबल पहले Indian Secular Front (ISF) इस्तेमाल करता था, तो फिर आयोग ने अन्य **183** विकल्पों में से इसे क्यों चुना?

कोर्ट की नाराजगी की वजह

West Bengal में 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों के लिए चुनाव आयोग की प्रक्रिया अब सवालों के घेरे में है। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान, बेंच ने रितब्रत बनर्जी के गुट को 'लिफाफा' सिंबल देने के फैसले पर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब आयोग के पास 180 से ज्यादा अन्य सिंबल मौजूद थे, तो विवादित सिंबल को ही क्यों चुना गया?

ISF की दलील और कानूनी पेच

इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के वकील और सीनियर एडवोकेट विकास रंजन भट्टाचार्य ने कोर्ट में तर्क दिया कि एक ही चुनाव चक्र में प्रतिद्वंद्वी गुट को पुराना सिंबल देना वोटर्स के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर सकता है। हालांकि ISF को अब 'अलमारी' (almirah) सिंबल दिया गया है, लेकिन पार्टी का मानना है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में प्रशासनिक चूक हुई है, जिससे चुनावी पारदर्शिता पर असर पड़ता है।

चुनाव आयोग का बचाव

चुनाव आयोग ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि ISF एक गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है, इसलिए 'लिफाफा' सिंबल को 'फ्री सिंबल' की कैटेगरी में रखा गया था। हालांकि, आयोग का यह तर्क हाईकोर्ट को पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर सका। बेंच ने टिप्पणी की कि यह एक पैटर्न बन गया है कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद प्रशासनिक फैसलों के लिए अक्सर न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत पड़ रही है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आयोग भविष्य के चुनावों के लिए अपने दिशा-निर्देशों में कोई सुधार करता है ताकि कानूनी विवादों और वोटर्स के बीच भ्रम को कम किया जा सके।

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