CNN, MS NOW और Politico ने व्हाइट हाउस के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की है। मीडिया संस्थाओं का आरोप है कि व्हाइट हाउस जानबूझकर चुनिंदा पत्रकारों को प्रतिबंधित कर रहा है, जो उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
कानूनी जंग की शुरुआत
व्हाइट हाउस द्वारा चुनिंदा पत्रकारों को एक्सेस देने से रोकने के बाद अब मामला अदालत तक पहुंच गया है। CNN, MS NOW और Politico ने कोर्ट से 'प्रीलिमिनरी इंजंक्शन' (Preliminary Injunction) की मांग की है। मीडिया हाउस का कहना है कि प्रशासन अपनी पसंद के मुताबिक कवरेज न होने पर पत्रकारों को निशाना बना रहा है और उन्हें सरकारी गतिविधियों को कवर करने से रोक रहा है।
क्या है असली विवाद?
हालांकि फिलहाल एक 'टेम्परेरी रेस्ट्रेनिंग ऑर्डर' लागू है, जिससे पूरी तरह बैन तो नहीं लग पाया है, लेकिन नेटवर्क का आरोप है कि उन्हें अभी भी 'प्रेसिडेंशियल ट्रैवल पूल' जैसे अहम इवेंट्स से बाहर रखा जा रहा है। यह पूल रिपोर्टर्स के लिए राष्ट्रपति के कामकाज को करीब से देखने का एक जरूरी जरिया है।
सरकार का पक्ष और कानूनी पेच
अटॉर्नी जनरल Todd Blanche ने प्रशासन का बचाव करते हुए तर्क दिया है कि व्हाइट हाउस में प्रवेश एक 'प्रिविलेज' है, न कि कोई अधिकार। यह विवाद 18 सितंबर से लागू हुई सरकारी पॉलिसी पर केंद्रित है, जिसे लेकर अब संविधान के First Amendment के तहत बहस छिड़ गई है।
मीडिया इंडस्ट्री का रुख
इस मामले में ABC, CBS, NBC और Fox News जैसे बड़े नेटवर्क्स ने भी एकजुटता दिखाई है। इन चैनल्स ने विरोध दर्ज कराने के लिए व्हाइट हाउस ब्रॉडकास्ट पूल में अपनी हिस्सेदारी अस्थायी रूप से रोक दी है। निवेशकों और मीडिया जगत के लिए यह कानूनी लड़ाई काफी अहम है, क्योंकि प्रेस की पहुंच पर किसी भी तरह की पाबंदी सीधे तौर पर न्यूज कंपनियों की ऑपरेशनल क्षमता और काम करने के तरीके को प्रभावित करती है। अब सबकी निगाहें आने वाली कोर्ट हियरिंग पर हैं, जहां यह तय होगा कि क्या मौजूदा प्रोटेक्शन को स्थायी सुरक्षा में बदला जाएगा या नहीं।
