केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने देश भर के 27 रेस्तरां के खिलाफ ग्राहकों से अनिवार्य सेवा शुल्क (सर्विस चार्ज) वसूलने के लिए एक बड़ी नियामक कार्रवाई शुरू की है। इस कदम से इस प्रथा को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत उपभोक्ता अधिकारों और अनुचित व्यापार प्रथाओं का सीधा उल्लंघन घोषित किया गया है। दंड में ₹50,000 तक का जुर्माना और अवैध रूप से वसूले गए शुल्कों की अनिवार्य वापसी शामिल है।
नियामक कार्रवाई: प्राधिकरण ने राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की, जिसमें बिलों में स्वचालित रूप से 10% सेवा शुल्क जोड़े जाने की बात सामने आई थी। जांच में पुष्टि हुई कि पटना के कैफे ब्लू बॉटल और मुंबई के चाइना गेट रेस्तरां प्राइवेट लिमिटेड (बोरा बोरा) जैसे प्रतिष्ठान इस प्रथा का पालन कर रहे थे। इस तरह के अनिवार्य शुल्क सीसीपीए द्वारा जुलाई 2022 में जारी दिशानिर्देशों द्वारा स्पष्ट रूप से निषिद्ध हैं, जो स्वचालित शुल्क, छिपे हुए नामों के तहत संग्रह और भुगतान से इनकार करने वाले ग्राहकों को सेवा से इनकार करने पर रोक लगाते हैं।
कानूनी मिसाल और प्रवर्तन: सीसीपीए के प्रवर्तन को दिल्ली उच्च न्यायालय के हालिया फैसलों से बल मिला है। अदालत ने सेवा शुल्क पर सीसीपीए के दिशानिर्देशों को स्पष्ट रूप से बरकरार रखा है, जिसमें कहा गया है कि अनिवार्य संग्रह एक अनुचित व्यापार प्रथा है और कानून के विरुद्ध है। इसने इन विनियमों को लागू करने के लिए सीसीपीए के पूर्ण अधिकार की भी पुष्टि की है। सीसीपीए ने सतर्क रहने, शिकायतों की लगातार निगरानी करने और किसी भी गैर-अनुपालक रेस्तरां के खिलाफ सख्त उपाय करने का इरादा व्यक्त किया है, जिससे देशभर में उपभोक्ता हितों की रक्षा हो सके।