CBI ने सुप्रीम कोर्ट से Twisha Sharma केस का ट्रायल भोपाल से दिल्ली ट्रांसफर करने की गुहार लगाई है। जांच एजेंसी का मानना है कि मुख्य आरोपी Giribala Singh, जो खुद एक पूर्व डिस्ट्रिक्ट जज रही हैं, के प्रभाव के कारण भोपाल में निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगा दी है।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर मांग की है कि Twisha Sharma की मौत के मामले को भोपाल से बाहर ट्रांसफर किया जाए। जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि मुख्य आरोपी Giribala Singh, जो मृतक की सास हैं, एक पूर्व डिस्ट्रिक्ट जज रही हैं। एजेंसी का आरोप है कि उनका स्थानीय कानूनी समुदाय में रसूख गवाहों को प्रभावित करने और न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने का कारण बन सकता है।\n\n### साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ का आरोप\n\nअपनी याचिका में CBI ने केस की शुरुआती जांच को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। एजेंसी का दावा है कि 12 मई की घटना के बाद क्राइम सीन के साथ छेड़छाड़ करने और सबूतों को मिटाने की कोशिशें की गई थीं। राज्य पुलिस की शुरुआती जांच में पाई गई अनियमितताओं और इन बाधाओं के चलते CBI का मानना है कि न्याय की खातिर मुकदमे को दिल्ली शिफ्ट करना अनिवार्य है।\n\n### सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम\n\nफिलहाल, चीफ जस्टिस Surya Kant के नेतृत्व वाली बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। मृतक के पिता Navnidhi Sharma ने भी इस ट्रांसफर याचिका का समर्थन किया है। सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी विपरीत कानूनी कार्रवाई को रोकने के लिए भोपाल सेशन कोर्ट में चल रहे ट्रायल पर फिलहाल 'स्टे' (Stay) लगा दिया है। हालिया सुनवाई में कोर्ट ने डिफेंस काउंसिल की एक हफ्ते की मोहलत की मांग को भी मान लिया है।\n\nइस घटनाक्रम से पहले, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने Giribala Singh की एंटीसिपेटरी बेल (Anticipatory Bail) रद्द कर दी थी, जिससे CBI को दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा के आरोपों की गहन जांच करने का रास्ता साफ हो गया था। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि इस मामले की आगे की कानूनी लड़ाई किस शहर में लड़ी जाएगी।
