CBI ने अनिल अंबानी और Reliance Capital के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। मामला LIC को हुए ₹2,684.5 करोड़ के कथित नुकसान से जुड़ा है, जो साल 2012 से 2018 के बीच किए गए डिबेंचर निवेशों के कारण हुआ था।
क्या है पूरा मामला?
केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) ने अनिल अंबानी, रिलायंस कैपिटल लिमिटेड और कंपनी के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर सतीश सेठ के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया है। जांच का मुख्य केंद्र LIC द्वारा Reliance Capital के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स में किया गया ₹3,900 करोड़ का निवेश है। एजेंसी का आरोप है कि LIC को गलत जानकारियां देकर इन डिबेंचर्स में निवेश के लिए प्रेरित किया गया था, जिससे सरकारी बीमा कंपनी को ₹2,684.5 करोड़ का भारी नुकसान उठाना पड़ा।
फंड डायवर्जन का आरोप
FIR के अनुसार, कंपनी ने इन फंड्स को कॉर्पोरेट जरूरतों और कर्ज चुकाने के लिए इस्तेमाल करने का दावा किया था, लेकिन CBI का आरोप है कि पैसों को कहीं और डायवर्ट किया गया। अब जांच एजेंसी इस बात की तहकीकात कर रही है कि इन पैसों का इस्तेमाल आखिरकार कहां किया गया और इस पूरी प्रक्रिया में किन लोक सेवकों की भूमिका संदिग्ध रही है।
NCLT प्रक्रिया पर असर
यह कानूनी संकट ऐसे समय में आया है जब Reliance Capital पहले से ही NCLT (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) के जरिए इन्सॉल्वेंसी प्रोसेस से गुजर रही है। नवंबर 2021 में RBI ने कंपनी के बोर्ड को भंग कर दिया था और अब इसे हिंदुजा ग्रुप की कंपनी IndusInd International Holdings Ltd (IIHL) को सौंपने की प्रक्रिया चल रही है।
अनिल अंबानी का पक्ष
अनिल अंबानी के प्रवक्ता ने आरोपों को सिरे से खारिज किया है। प्रवक्ता का कहना है कि वे इस मामले में कानूनी रूप से अपना पक्ष रखने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंबानी नवंबर 2021 तक कंपनी के बोर्ड में नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और चेयरमैन थे, जब तक कि RBI के प्रशासक ने कमान नहीं संभाली थी। अब सबकी नजरें कोर्ट में होने वाली सुनवाई और CBI की आगे की रिपोर्ट पर टिकी हैं।
