केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने तमिलनाडु में Directorate General of Civil Aviation (DGCA) के एक डिप्टी डायरेक्टर को **₹2.5 लाख** की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई से एविएशन और एयरोस्पेस सेक्टर में प्रशासनिक देरी और सख्त अनुपालन (compliance) की आशंका बढ़ गई है।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने तमिलनाडु में Directorate General of Civil Aviation (DGCA) के डिप्टी डायरेक्टर को ₹2.5 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा है। यह गिरफ्तारी 4 अक्टूबर, 2026 को की गई। यह घटना देश की सबसे महत्वपूर्ण विमानन नियामक संस्था के भीतर चल रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़े अभियान का हिस्सा है।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
DGCA कोई लिस्टेड कंपनी नहीं है, इसलिए इसके शेयर पर कोई सीधा असर नहीं पड़ता है। लेकिन, एविएशन और एयरोस्पेस सेक्टर की पूरी कार्यप्रणाली DGCA पर निर्भर है। चाहे वह पायलट लाइसेंस हो, एयरवर्थनेस सर्टिफिकेट हो या फिर एविएशन उपकरणों के आयात की अनुमति—हर काम के लिए कंपनियों को इन्हीं के पास जाना पड़ता है।
पहले भी हो चुकी है बड़ी कार्रवाई
यह पहली बार नहीं है जब DGCA विवादों में आया है। इससे पहले अप्रैल 2026 में दिल्ली में एक सीनियर डिप्टी डायरेक्टर जनरल (एयरवर्थनेस) को ड्रोन आयात मंजूरी से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था। उस मामले में Reliance Industries और उसकी सहायक कंपनी Asteria Aerospace के अधिकारियों का नाम भी सामने आया था।
क्या है चिंता का विषय?
रेगुलेटर के भीतर बार-बार हो रही ऐसी जांचों का असर प्राइवेट कंपनियों पर पड़ सकता है। प्रशासन में सख्ती बढ़ने से इंटरनल ऑडिट बढ़ेंगे, जिससे नए प्रोजेक्ट्स को क्लीयरेंस मिलने में देरी हो सकती है। निवेशकों को सलाह है कि वे उन कंपनियों पर नजर रखें जिन्हें अपनी प्रोजेक्ट मंजूरी के लिए DGCA पर निर्भर रहना पड़ता है, क्योंकि रेगुलेटरी अड़चनें उनके कामकाज की रफ्तार धीमी कर सकती हैं।
