Antilia बम कांड में फंसे पूर्व पुलिस अधिकारी Sachin Waze को फिलहाल राहत नहीं मिली है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने उनकी जमानत पर रोक को बरकरार रखा है। कोर्ट ने सवाल उठाया है कि महज **₹90,000** की सरकारी सैलरी पाने वाला अधिकारी आखिर कैसे फाइव-स्टार होटल और महंगी लग्जरी गाड़ियां अफोर्ड कर रहा था।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। कोर्ट ने साफ तौर पर पूछा है कि एक असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर की सैलरी ₹90,000 के आसपास थी, तो फिर ओबेरॉय होटल में लंबे समय तक रुकने और महंगी गाड़ियां इस्तेमाल करने का पैसा कहां से आया? यह सवाल अब जांच के घेरे में है कि क्या यह पैसा अवैध वसूली का हिस्सा था।
NIA का कड़ा विरोध
National Investigation Agency (NIA) ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया है कि अगर Sachin Waze को बाहर आने दिया गया, तो वह सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं और गवाहों को डरा-धमका सकते हैं। एजेंसी का मानना है कि वह भागने की फिराक में भी हो सकते हैं, इसलिए उन्हें कस्टडी में रखना ही उचित है।
क्या है मामला?
Sachin Waze पर एंटीलिया (मुकेश अंबानी का घर) के बाहर विस्फोटक रखने और मनसुख हिरेन की मौत के गंभीर आरोप हैं। उन पर UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) जैसी सख्त धाराएं भी लगी हैं। फिलहाल, वह ठाणे सेंट्रल जेल में बंद हैं। अभियोजन पक्ष ने स्पष्ट किया है कि वे 150 गवाहों के साथ ट्रायल शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर, 2026 को होगी, जहाँ यह तय होगा कि जमानत पर लगी रोक जारी रहेगी या नहीं।
