बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2006 के औरंगाबाद आर्म्स हाल मामले में दोषी मोहम्मद आमिर शकील अहमद शेख की सजा को निलंबित करने की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए यह फैसला सुनाया है।
कोर्ट का सख्त रुख
जस्टिस मनीष पिटाले और जस्टिस श्रीराम वी. शिरसाट की बेंच ने स्पष्ट किया कि आतंकी गतिविधियों से जुड़े गंभीर आरोपों के चलते दोषी को अपील के दौरान राहत नहीं दी जा सकती। मोहम्मद आमिर शकील अहमद शेख ने अपनी उम्रकैद की सजा को निलंबित करने की गुहार लगाई थी, जिसे कोर्ट ने नामंजूर कर दिया।
क्या है 2006 का मामला?
यह मामला मई 2006 का है, जब मुंबई एटीएस (ATS) ने औरंगाबाद के घृष्णेश्वर मंदिर के पास एक वाहन को रोका था। तलाशी के दौरान पुलिस ने हथियारों का जखीरा बरामद किया था, जिसमें 10 AK-47 राइफलें, कई मैगजीन, सैकड़ों कारतूस और 30 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री शामिल थी। इस मामले में UAPA, आर्म्स एक्ट और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई थी।
दलीलों को किया खारिज
दोषी ने अपने बचाव में दलील दी थी कि उसका कबूलनामा वापस ले लिया गया था और अन्य सह-आरोपियों को जमानत मिल गई है, इसलिए उसे भी राहत मिलनी चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य सबूतों के आधार पर आरोप पुख्ता साबित होते हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि जन सुरक्षा सर्वोपरि है।
बाजार पर असर
निवेशकों को यह नोट करना चाहिए कि यह पूरी तरह से एक कानूनी मामला है। इसका किसी भी लिस्टेड कंपनी, फाइनेंशियल सेक्टर या भारतीय शेयर बाजार पर कोई सीधा या अप्रत्यक्ष प्रभाव नहीं है। मामले की अगली औपचारिक सुनवाई दिसंबर 2026 में होनी है।
