बॉम्बे हाई कोर्ट ने विजय माल्या को सोशल मीडिया पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) का एफिडेविट साझा करने के लिए कड़ी चेतावनी दी है। कोर्ट बैंक बकाये से जुड़े दावों की जांच कर रहा है और अब SBI के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम से वसूली गई राशि की नई रिपोर्ट मांगी है।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने विजय माल्या को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस मिलिंद जाधव ने माल्या द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) के एफिडेविट को सार्वजनिक करने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने साफ किया कि कानूनी मामलों पर बहस कोर्ट के अंदर होनी चाहिए, न कि सोशल मीडिया पर, क्योंकि ऐसी हरकतें कानूनी स्थिति को और उलझा सकती हैं।
विवाद की जड़ क्या है?
विवाद का मुख्य बिंदु बैंक रिकवरी से जुड़े दावे हैं। विजय माल्या का तर्क है कि बैंकों के कंसोर्टियम द्वारा संपत्ति की वसूली के बाद उनकी देनदारियां पूरी हो चुकी हैं। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि उनकी आपराधिक मामलों में स्थिति और भारतीय अदालतों से उनकी अनुपस्थिति, सिविल रिकवरी प्रक्रिया से बिल्कुल अलग है।
क्या है रिकवरी का आंकड़ा?
प्रवर्तन निदेशालय ने कोर्ट को जानकारी दी है कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम ने 'डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल' (DRT) के जरिए अब तक लगभग ₹14,131 करोड़ की वसूली कर ली है। दावों के बीच विरोधाभास को देखते हुए, कोर्ट ने अब बैंकों से एक नया हलफनामा (Affidavit) दाखिल करने को कहा है, जिसमें वसूली गई कुल राशि का सही आंकड़ा पेश किया जाएगा।
मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को तय की गई है। उस दिन कोर्ट माल्या की नई अर्जी और बैंकों द्वारा जमा किए गए ताजा आंकड़ों की समीक्षा करेगा, जो बैड लोन और रिकवरी प्रक्रिया से जुड़े निवेशकों के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होगा।
