बॉम्बे हाई कोर्ट ने Schaeffler India के एमडी हर्ष गोपाल कदम के खिलाफ चल रही जांच पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह मामला जून 2026 में हुई एक फैक्ट्री दुर्घटना से जुड़ा है, जिसमें कोर्ट ने प्रक्रिया और सबूतों की कमी पर सवाल उठाए हैं।
कोर्ट ने क्यों दिया दखल?
जस्टिस मिलिंद एन. जाधव की बेंच ने सुनवाई के दौरान इस बात पर हैरानी जताई कि घटना के कई महीने बीत जाने के बाद उन पर गंभीर धाराएं क्यों जोड़ी गईं। कोर्ट ने माना कि सितंबर 2026 में दाखिल की गई शुरुआती चार्जशीट में उन पर ऐसे कोई गंभीर आरोप नहीं थे। पुलिस द्वारा भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत 'गैर-इरादतन हत्या' (culpable homicide) जैसे गंभीर आरोप जोड़ने के कानूनी आधार पर अदालत ने सवाल उठाए हैं।
क्या था पूरा मामला?
यह दुखद हादसा 9 जून, 2026 को कंपनी के तलेगांव मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में हुआ था। एक सिलेंडर बदलने के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड गैस लीक होने से 2 कर्मचारियों की जान चली गई थी। शुरुआती जांच में प्लांट हेड, सेफ्टी ऑफिसर और मेंटेनेंस स्टाफ को आरोपी बनाया गया था, लेकिन उस समय एमडी का नाम चार्जशीट में नहीं था।
बचाव पक्ष की दलील
एमडी हर्ष गोपाल कदम के वकीलों ने कोर्ट में स्पष्ट किया कि वह दैनिक मेंटेनेंस कार्यों की निगरानी नहीं करते हैं और घटना के समय वे मौके पर मौजूद भी नहीं थे। कोर्ट ने यह भी गौर किया कि पुलिस ने अक्टूबर में गिरफ्तारी से पहले उनका बयान लिया था, लेकिन ऐसी कोई नई ठोस सामग्री पेश नहीं की जो गिरफ्तारी को उचित ठहरा सके। पुणे स्थित कॉर्पोरेट ऑफिस से हुई यह गिरफ्तारी कानूनी प्रक्रिया के लिहाज से संदिग्ध मानी गई।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
Schaeffler India ऑटोमोटिव और इंडस्ट्रियल बेयरिंग सेक्टर की दिग्गज कंपनी है। निवेशकों के लिए मैनेजमेंट में स्थिरता बहुत मायने रखती है। फिलहाल कोर्ट से मिली इस राहत से कंपनी के गवर्नेंस और मैनेजमेंट के काम में आ रही रुकावटें कुछ हद तक कम होंगी। हालांकि, सेफ्टी और कंप्लायंस को लेकर यह मामला भविष्य में कंपनी की निगरानी के लिए एक अहम 'मॉनिटरेबल' फैक्टर बना रहेगा।
