Maratha Reservation: बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, प्रदर्शन पर रोक लगाने से किया इनकार

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Maratha Reservation: बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, प्रदर्शन पर रोक लगाने से किया इनकार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रदर्शन करने के अधिकार को संवैधानिक बताते हुए मनोज जारांगे पाटिल के मुंबई मार्च पर रोक लगाने वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने साफ किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 11 सितंबर, 2026 को उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें एक्टिविस्ट मनोज जारांगे पाटिल के मुंबई मार्च को पहले ही रोकने की मांग की गई थी। चीफ जस्टिस एमसी त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की बेंच ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में विरोध करना एक मौलिक अधिकार है और केवल सार्वजनिक अव्यवस्था की आशंका के आधार पर प्रदर्शन पर पूरी तरह पाबंदी नहीं लगाई जा सकती।

सरकार की जिम्मेदारी

कोर्ट ने कहा कि बड़े स्तर के प्रदर्शनों को संभालने का जिम्मा राज्य प्रशासन का है। बेंच ने टिप्पणी की कि सरकार को न्यायिक हस्तक्षेप के बजाय बातचीत और उचित प्रशासन के जरिए कानून-व्यवस्था की चुनौतियों से निपटना चाहिए। एडवोकेट जनरल मिलिंद साठे ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि प्रशासन प्रदर्शनकारियों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए पूरी तरह तैयार है।

बिजनेस पर असर

निवेशकों और बिजनेस कम्युनिटी के लिए चिंता का मुख्य विषय मुंबई में लॉजिस्टिक्स और दैनिक कामकाज की स्थिरता है। अतीत में हुए बड़े प्रदर्शनों के कारण स्थानीय ट्रैफिक, सप्लाई चेन और प्रमुख व्यावसायिक हब में उपस्थिति प्रभावित होती रही है। हाईकोर्ट के इस आदेश ने पूरी जिम्मेदारी राज्य पर डाल दी है कि वे संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करते हुए बिजनेस ऑपरेशंस में कम से कम बाधा आने दें।

वर्तमान स्थिति

मनोज जारांगे पाटिल अभी भी मराठा समुदाय को कुनबी जाति प्रमाण पत्र के दायरे में लाने की मांग पर अड़े हुए हैं और जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में भूख हड़ताल पर हैं। अब मार्केट पार्टिसिपेंट्स की नजर इस बात पर रहेगी कि राज्य सरकार मुंबई में प्रदर्शनकारियों की भीड़ को कैसे मैनेज करती है और कानून-व्यवस्था की क्या स्थिति रहती है।

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