पुणे की 40 एकड़ जमीन के विवादित सौदे में बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र प्रशासन से तीखे सवाल पूछे हैं। कोर्ट ने जानना चाहा है कि Amadea Enterprises LLP में 99% हिस्सेदारी रखने वाला मुख्य लाभार्थी अब तक जांच के दायरे से बाहर क्यों है?
बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुणे के मुंधवा में हुए 40 एकड़ के विवादित जमीन सौदे की जांच प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने सुनवाई के दौरान इस बात पर सवाल खड़े किए कि जब इस सौदे में शामिल अन्य लोगों पर कार्रवाई हो रही है, तो Amadea Enterprises LLP के मुख्य लाभार्थी को अब तक जांच से दूर क्यों रखा गया है।\n\nयह पूरा मामला सरकारी जमीन के अधिग्रहण से जुड़ा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी ने इस जमीन को केवल ₹300 करोड़ में खरीद लिया था, जबकि बाजार में इसकी अनुमानित कीमत ₹1,800 करोड़ के आसपास बताई जा रही है। यही नहीं, इस सौदे में सरकारी मंजूरी को दरकिनार करने और ₹21 करोड़ की स्टैंप ड्यूटी छूट को लेकर भी बड़े सवाल उठे हैं।\n\nजुलाई 2026 में पुणे की सिविल कोर्ट ने इस सेल डीड को रद्द कर दिया था, लेकिन अब हाईकोर्ट का फोकस इस बात पर है कि आखिर इस खरीदारी के पीछे के असली जिम्मेदार लोगों पर शिकंजा क्यों नहीं कसा जा रहा। अदालत ने साफ कहा कि प्रशासन केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई कर रहा है, जबकि बड़े हिस्सेदारों को बख्शा जा रहा है।\n\nइस मामले में कोर्ट की दखल के बाद, अब महाराष्ट्र के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस ने पुणे पुलिस कमिश्नर को मामले की और अधिक गहन और प्रोफेशनल तरीके से जांच करने के आदेश दिए हैं। हालांकि Amadea Enterprises LLP एक प्राइवेट लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप है और इसका शेयर बाजार से सीधा संबंध नहीं है, लेकिन यह केस बड़े लैंड डील्स में पारदर्शिता और कानूनी जांच की अहमियत को रेखांकित करता है।
