एंटीलिया बम कांड मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट पूर्व पुलिस अधिकारी Sachin Waze की जमानत के खिलाफ NIA की अपील पर सुनवाई कर रहा है। जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की बेंच यह परख रही है कि क्या इस घटना को UAPA के तहत आतंकवादी गतिविधि माना जा सकता है।
UAPA और कानून की पेचीदगियां
बॉम्बे हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की बेंच ने NIA से तीखे सवाल किए हैं। कोर्ट यह समझने की कोशिश कर रहा है कि क्या विस्फोटक मिलने की घटना को सीधे तौर पर आतंकवाद के दायरे में रखा जाना चाहिए। यदि यह साबित नहीं होता, तो UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) का लागू होना और आरोपी की जमानत पर असर पड़ना एक बड़ा कानूनी मोड़ साबित हो सकता है। फिलहाल, निचली अदालत द्वारा Sachin Waze को दी गई जमानत पर रोक जारी है और वे ठाणे सेंट्रल जेल में बंद हैं।
पुलिस रिकॉर्ड और विवादित बहाली
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आरोपी के पिछले सर्विस रिकॉर्ड पर भी गौर किया। जजों ने विशेष रूप से 17 साल के उस निलंबन का जिक्र किया, जो एक कस्टोडियल डेथ मामले के बाद हुआ था। 2020 में हुई उनकी विवादित बहाली और 2021 में हुई गिरफ्तारी के बाद उनकी बर्खास्तगी पर भी चर्चा हुई। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि क्या जमानत मिलने पर उनकी नौकरी या पद का कोई प्रभाव पड़ सकता है, जिसके जवाब में डिफेंस ने पुष्टि की कि उन्हें सेवा से औपचारिक रूप से बर्खास्त किया जा चुका है।
आगे का रास्ता
कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। जब तक हाई कोर्ट का अंतिम आदेश नहीं आता, तब तक विशेष अदालत के जमानत आदेश पर रोक बनी रहेगी। यह फैसला न केवल Sachin Waze के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भी तय करेगा कि देश की अदालतों में भविष्य में आतंकवाद के आरोपों को किस तरह परिभाषित किया जाएगा।
