बॉम्बे हाईकोर्ट ने Dharma Productions और Dharmatic Entertainment को बड़ी राहत देते हुए उन पर लगे **₹79.7 करोड़** के GST डिमांड को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि फिल्में 'IT सॉफ्टवेयर' की श्रेणी में नहीं आती हैं।
बॉम्बे हाईकोर्ट की जस्टिस M.S. कार्णिक और जस्टिस संदेश पाटिल की बेंच ने Dharma Productions और Dharmatic Entertainment के पक्ष में अपना फैसला सुनाया है। मामला 2017 से 2021 के बीच फिल्म कॉपीराइट की लाइसेंसिंग के वर्गीकरण से जुड़ा था।
विवाद की मुख्य वजह
टैक्स अधिकारियों का तर्क था कि चूंकि फिल्में डिजिटल लिंक या हार्ड ड्राइव के जरिए डिलीवर की जाती हैं, इसलिए इन्हें 'IT सॉफ्टवेयर सर्विस' माना जाना चाहिए। इस वर्गीकरण के आधार पर अधिकारियों ने 18% GST की मांग की थी, जबकि कंपनी इसे बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights) के तहत 12% के दायरे में मान रही थी।
कोर्ट का अहम फैसला
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि फिल्में 'पैसिव ऑडियो-विजुअल' कंटेंट हैं और इनमें सॉफ्टवेयर जैसी इंटरएक्टिविटी नहीं होती। डिलीवरी का माध्यम (डिजिटल या फिजिकल) फिल्म की मौलिक प्रकृति को नहीं बदल सकता। कोर्ट के इस फैसले से प्रोडक्शन हाउस को करोड़ों रुपये के संभावित टैक्स बोझ से बड़ी राहत मिली है।
इंडस्ट्री पर असर
यह फैसला मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा कानूनी आधार (Legal Precedent) बनेगा। डिजिटल युग में कंटेंट वितरण के बढ़ते तरीकों के बीच, अब प्रोडक्शन हाउस को टैक्स प्लानिंग में अधिक स्पष्टता मिलेगी और भविष्य में इस तरह के विवादों में कमी आने की उम्मीद है।
