Bombay HC का Election Commission को कड़ा झटका, वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर जताई नाराजगी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Bombay HC का Election Commission को कड़ा झटका, वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर जताई नाराजगी

Bombay High Court ने वोटर लिस्ट से नाम गायब होने के मामले में Election Commission को फटकार लगाई है। कोर्ट ने साफ किया है कि किसी भी सॉफ्टवेयर की खामी के कारण कानून से ऊपर कोई प्रशासनिक सिस्टम काम नहीं कर सकता।

सॉफ्टवेयर की गलती का खामियाजा

Bombay High Court की गोवा बेंच ने Election Commission of India (ECI) के कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। जस्टिस Amit S. Jamsandekar और जस्टिस Valmiki Menezes की बेंच ने स्पष्ट किया है कि ECI का ERONET सॉफ्टवेयर तकनीकी रूप से सक्षम नहीं है, जिसके कारण वैध मतदाताओं के नाम गलती से लिस्ट से हटा दिए गए।

Form 8 और विवाद की जड़

पूरा मामला Form 8 (पता बदलने या अपडेट करने) से जुड़ा है। कोर्ट ने एक ऐसे परिवार का उदाहरण दिया, जहां एड्रेस अपडेट न होने पर सॉफ्टवेयर ने इसे रिजेक्ट कर दिया और इसके साथ ही उनके मौजूदा वोटर स्टेटस को ही डिलीट कर दिया। ECI की प्रक्रिया ने उन्हें दोबारा नए सिरे से रजिस्ट्रेशन करने को कहा, जो कि मौजूदा नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन है।

कानून सर्वोपरि, सिस्टम नहीं

कोर्ट ने दो टूक कहा कि 'Representation of the People Act' जैसे संवैधानिक कानूनों के आगे कोई भी प्रशासनिक या तकनीकी सिस्टम (Software) प्रभावी नहीं हो सकता। कोर्ट ने ECI से पूछा है कि बिना उचित सुनवाई के नाम हटाने का कानूनी अधिकार उन्हें किसने दिया।

आगे क्या होगा?

यह मामला केवल एक तकनीकी गड़बड़ी तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र में चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। कई याचिकाओं में यह डर जताया गया है कि अगर इसे सही नहीं किया गया, तो आने वाले समय में लाखों पात्र मतदाता वोट देने से वंचित रह सकते हैं। अब ECI पर दबाव है कि वह अपने डिजिटल टूल्स को कानूनी मानकों के अनुरूप ढाले ताकि जनता का लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भरोसा बना रहे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.