बॉम्बे हाई कोर्ट ने Shreya Life Sciences को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने कंपनी को अपने एंटीबायोटिक ब्रांड 'Lefoxin Biox' का नाम बदलने का आदेश दिया है, क्योंकि यह नाम Glaxo Group की हार्ट मेडिसिन 'Lanoxin' से काफी मिलता-जुलता है।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कानूनी फैसले में Shreya Life Sciences Pvt Ltd को निर्देश दिया है कि वह अपने एंटीबायोटिक प्रोडक्ट 'Lefoxin Biox' का नाम बदले। यह फैसला Glaxo Group की याचिका पर आया है, जिन्होंने तर्क दिया था कि यह नाम उनकी दशकों पुरानी हार्ट मेडिसिन 'Lanoxin' के साथ भ्रम पैदा कर सकता है।
कानूनी तर्क और मरीजों की सुरक्षा
न्यायमूर्ति सोमशेखर सुंदरेसन ने सुनवाई के दौरान पाया कि दोनों दवाओं के नाम देखने और सुनने में लगभग एक जैसे हैं। फार्मा सेक्टर में नाम की समानता एक गंभीर सुरक्षा जोखिम है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 1950 के दशक से चल रही दवा 'Lanoxin' के साथ भ्रम की स्थिति पैदा होना मरीजों की सेहत के लिए घातक साबित हो सकता है।
समय सीमा और अनुपालन
कंपनी को सुचारू रूप से बदलाव करने के लिए कोर्ट ने 31 दिसंबर 2026 तक का समय दिया है। इस अवधि का उपयोग मौजूदा स्टॉक को बाजार से हटाने और सप्लाई चेन में बदलाव करने के लिए किया जाएगा। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, 1 जनवरी 2027 तक नई ब्रांडिंग और नई पहचान को पूरी तरह लागू करना अनिवार्य है।
बिजनेस पर असर
फार्मा कंपनी के लिए कोर्ट का यह आदेश एक बड़ी चुनौती है। नाम बदलने के अलावा, कंपनी को नई पैकेजिंग, मेडिकल लिटरेचर को अपडेट करने और डॉक्टरों व फार्मासिस्टों को सूचित करने पर भारी खर्च करना होगा। सबसे बड़ी चुनौती ब्रांड इक्विटी को बनाए रखने की है, क्योंकि डॉक्टर्स का भरोसा एक खास नाम पर टिका होता है। यह मामला फार्मा सेक्टर में ट्रेडमार्क और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी की अहमियत को फिर से रेखांकित करता है।
