Bombay High Court ने पालघर के Relief Hospital में हुई तोड़फोड़ की जांच को 'हास्यास्पद' और 'गंभीर रूप से त्रुटिपूर्ण' करार दिया है। 14 नई गिरफ्तारियों के बाद, जिनमें एक स्थानीय विधायक का बेटा भी शामिल है, कोर्ट ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को मामले की समीक्षा करने का आदेश दिया है।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने पालघर के Relief Hospital में हुई हिंसा और तोड़फोड़ की जांच को लेकर तीखी नाराजगी जाहिर की है। शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को जस्टिस ए.एस. गडकरी और जस्टिस कमल खाता की बेंच ने पुलिस जांच को 'हास्यास्पद' और 'बेहद सतही' बताते हुए कड़ी फटकार लगाई।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना 5 सितंबर की रात की है, जब कथित तौर पर शिवसेना समर्थित एक भीड़ ने अस्पताल में घुसकर तोड़फोड़ की, स्टाफ को डराया-धमकाया और ICU से एक मरीज को जबरन बाहर निकाल लिया। हमलावरों का आरोप था कि अस्पताल ने 'दही हांडी' उत्सव के दौरान घायल हुए लोगों के इलाज के लिए भारी फीस वसूली थी।
बड़ी गिरफ्तारियां और कोर्ट का रुख
सुनवाई के दौरान पालघर पुलिस ने 14 और लोगों को गिरफ्तार करने की जानकारी दी, जिसमें शिवसेना विधायक राजेंद्र गावित के बेटे रोहित गावित का नाम भी शामिल है। इससे पहले कोर्ट ने पुलिस से सवाल किया था कि घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी आरोपी बाहर क्यों घूम रहे थे।
प्रक्रियागत खामियां
कोर्ट ने जांच के दौरान कई बड़ी प्रशासनिक गलतियां पकड़ी हैं। बेंच ने स्टेशन डायरी और 'पंचनामा' रिपोर्ट में हुई त्रुटियों पर सवाल उठाए, जो भविष्य में केस को कमजोर कर सकती हैं। इन खामियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने कोंकण डिवीजन के एडिशनल इंस्पेक्टर जनरल को पूरे मामले की फिर से जांच करने का निर्देश दिया है। अब पुलिस को 17 सितंबर 2026 तक इस मामले में पूरी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करनी होगी।
