बॉम्बे हाईकोर्ट ने पूर्व पुलिस अधिकारी Sachin Waze की जमानत रद्द कर दी है। कोर्ट ने NIA की अपील को स्वीकार करते हुए उन्हें जेल में ही रहने का आदेश दिया है, जिससे 2021 के एंटीलिया बम कांड में उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।
कोर्ट का सख्त रुख
5 नवंबर, 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए पूर्व पुलिस अधिकारी Sachin Waze को मिली जमानत को खारिज कर दिया है। जस्टिस गिरीश एस. कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की खंडपीठ ने निचली अदालत के सितंबर 2026 के फैसले को पलट दिया है। इस आदेश के बाद अब Waze को वापस ठाणे सेंट्रल जेल में रहना होगा।
क्या है पूरा मामला?
यह केस फरवरी 2021 की उस घटना से जुड़ा है, जब मुकेश अंबानी के आवास 'एंटीलिया' के बाहर जिलेटिन की छड़ों से लदी एक स्कॉर्पियो कार मिली थी। इस घटना के बाद कार मालिक मनसुख हिरन की संदिग्ध मौत ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। NIA का आरोप है कि Sachin Waze ने वसूली के मकसद से इस पूरी साजिश को अंजाम दिया था।
NIA की दलील और कानूनी पहलू
जांच एजेंसी NIA ने निचली अदालत के जमानत आदेश को चुनौती दी थी। एजेंसी ने कोर्ट में तर्क दिया कि निचली अदालत ने UAPA की धारा 43D(5) के तहत कानूनी प्रावधानों को सही ढंग से नहीं देखा। हाईकोर्ट ने इस तर्क को माना कि गंभीर आपराधिक साजिश और आतंकी गतिविधियों से जुड़े मामलों में आरोपी को हिरासत में रखना आवश्यक है।
गवर्नेंस और कानूनी स्थिति
यह फैसला कॉर्पोरेट सुरक्षा और कानूनी व्यवस्था के नजरिए से काफी महत्वपूर्ण है। हालांकि इसका किसी लिस्टेड कंपनी के शेयर भाव पर सीधा असर नहीं है, लेकिन यह भारत के कानूनी परिदृश्य में चल रहे हाई-प्रोफाइल मामलों में एक बड़ा कदम है। अब यह मामला ट्रायल कोर्ट में आगे बढ़ेगा, जहां NIA सबूत पेश करना जारी रखेगी।
