बंगलुरु की एक अदालत ने 2018 में हुई नवीन कुमार मिधा की बर्खास्तगी को गैरकानूनी करार दिया है। कोर्ट ने Willis Towers Watson को मुआवजे के तौर पर **₹3.7 करोड़** का भुगतान करने का आदेश दिया है।
कोर्ट का सख्त आदेश
बंगलुरु की LXIX एडिशनल सिटी सिविल एंड सेशंस कोर्ट ने Willis Towers Watson के खिलाफ एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने माना कि सितंबर 2018 में पूर्व एग्जीक्यूटिव नवीन कुमार मिधा को नौकरी से निकालना गलत था और कंपनी ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया। फैसले के अनुसार, कंपनी को ₹3.6 करोड़ का हर्जाना और मानसिक प्रताड़ना के लिए अतिरिक्त ₹10 लाख का भुगतान करना होगा।
क्या है पूरा विवाद?
नवीन कुमार मिधा का आरोप था कि उन्हें उनकी परफॉरमेंस के आधार पर नहीं, बल्कि कंपनी में चल रही वित्तीय अनियमितताओं को उजागर करने के कारण निकाला गया था। यह मामला कॉरपोरेट जगत में व्हिसलब्लोअर की सुरक्षा और इंटरनल गवर्नेंस पर बड़े सवाल खड़े करता है। कोर्ट ने कंपनी को मिधा को एक नया 'रिलीविंग लेटर' जारी करने और उनके करियर रिकॉर्ड से प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने का भी निर्देश दिया है।
इन कंपनियों को करना होगा भुगतान
कोर्ट ने चार संबंधित एंटिटी को संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराया है: Willis Towers Watson India Insurance Brokers, Willis Europe, Willis Towers Watson और Willis Towers Watson India। इन कंपनियों को यह राशि 30 दिन के भीतर जमा करनी होगी।
इन्वेस्टर्स और मार्केट जानकारों के लिए यह केस एक चेतावनी है कि कैसे कानूनी विवाद न केवल कंपनी के बैलेंस शीट पर असर डाल सकते हैं, बल्कि साख (Reputation) को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं।
