बेंगलुरु की एक विशेष अदालत ने Siddartha Vihar Trust से जुड़े जमीन आवंटन मामले में कर्नाटक लोकायुक्त को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह पूरा विवाद Bangalore Development Authority (BDA) द्वारा जमीन के गलत आवंटन के आरोपों पर केंद्रित है।
बेंगलुरु की सांसदों और विधायकों के लिए बनी विशेष अदालत ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और उनके बेटे प्रियांक खड़गे के खिलाफ दर्ज एक निजी शिकायत पर कर्नाटक लोकायुक्त को रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। इस मामले में भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर के लिए तय की है और लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक को तब तक औपचारिक रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
क्या है विवाद की जड़?
यह शिकायत 'लांचमुक्त कर्नाटक वेदिका' के अध्यक्ष विजयराघव मराठे ने दर्ज कराई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि Bangalore Development Authority (BDA) ने सिविल एमिनिटी साइट्स के आवंटन में भारी अनियमितताएं बरतीं। आरोप है कि 1994 में स्थापित 'सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट' ने नियमों को ताक पर रखकर अनुसूचित जाति श्रेणी के तहत जमीन हासिल की।
याचिका में दावा किया गया है कि ट्रस्ट को लीज राशि पर 50% की छूट मिली और बाद में एक वैकल्पिक साइट भी हासिल कर ली गई। इसमें BDA अधिकारियों की मिलीभगत और राजनीतिक प्रभाव के दुरुपयोग का शक जताया गया है।
कानूनी पेंच और प्रक्रिया
यह न्यायिक जांच कर्नाटक हाईकोर्ट द्वारा दिए गए प्रक्रियात्मक सुधार के बाद शुरू हुई है। 18 अगस्त के आदेश में, हाईकोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223 के तहत जांच के पिछले निर्देश को रद्द कर दिया था और धारा 175 के तहत आगे बढ़ने का निर्देश दिया। 10 सितंबर को शिकायतकर्ता द्वारा सुधारे गए हलफनामे के बाद, कोर्ट ने मामले की फिर से सुनवाई शुरू की। कोर्ट ने पहले ही अपनी शुरुआती टिप्पणियों में प्रथम दृष्टया अनियमितताओं के संकेत दिए थे। अब जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि क्या आवंटन के दौरान प्रोटोकॉल को दरकिनार किया गया और क्या इस प्रक्रिया में अनुचित प्रभाव डाला गया था।
