BJP सांसद बैजयंत पांडा ने AI के गलत इस्तेमाल से निपटने के लिए "Protection of Personality Likeness from Artificial Intelligence Misuse Bill, 2026" पेश किया है। इस बिल के तहत AI कंटेंट के लिए अनिवार्य डिस्क्लोजर और किसी व्यक्ति की पहचान का गलत इस्तेमाल करने पर ₹10 लाख तक के जुर्माने का प्रस्ताव है।
AI के दुरुपयोग पर शिकंजा कसने की तैयारी
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते दुरुपयोग को रोकने के लिए एक नया कानून लाने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। BJP सांसद बैजयंत पांडा ने "Protection of Personality Likeness from Artificial Intelligence Misuse Bill, 2026" संसद में पेश किया है। इस बिल का मुख्य उद्देश्य लोगों के चेहरों, आवाजों और अन्य व्यक्तिगत पहचानों को AI द्वारा उनकी अनुमति के बिना इस्तेमाल होने से बचाना है।
असली और नकली कंटेंट में फर्क, होगी पहचान
आज के दौर में AI की मदद से ऐसा कंटेंट बनाना आसान हो गया है जो बिल्कुल असली लगता है। इससे किसी की पहचान चुराने (impersonation) का खतरा भी बढ़ गया है। यह बिल एक कानूनी ढांचा तैयार करेगा जो असली और AI द्वारा बनाए गए नकली कंटेंट के बीच अंतर स्पष्ट करेगा। इसके तहत, किसी भी AI-जनित कंटेंट को स्पष्ट रूप से लेबल करना अनिवार्य होगा। बिल में यह भी सुझाव दिया गया है कि डिजिटल वॉटरमार्क की तरह तकनीकी मार्कर का इस्तेमाल किया जाए, जिससे यह पता चल सके कि कोई कंटेंट AI द्वारा बनाया गया है या नहीं। इन उपायों से यूज़र्स को सिंथेटिक मीडिया पहचानने और गलत सूचनाओं को फैलने से रोकने में मदद मिलेगी।
क्या हैं सजा के प्रावधान?
यह बिल उन लोगों के लिए गंभीर परिणाम तय करता है जो AI का इस्तेमाल दूसरों को धोखा देने या नुकसान पहुंचाने के लिए करते हैं। बिल के अनुसार, बिना सहमति के किसी की पहचान चुराना, धोखाधड़ी करना, या आपत्तिजनक कंटेंट बनाना जैसे अपराधों के लिए आपराधिक दायित्व तय किया जा सकता है। ऐसे मामलों में तीन साल तक की जेल या ₹10 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। हालांकि, बिल में रचनात्मक और सार्वजनिक कार्यों को प्रभावित न करने के लिए कुछ छूट भी दी गई है। सच्ची ख़बरों की रिपोर्टिंग, व्यंग्य (satire), पैरोडी और कलात्मक अभिव्यक्ति जैसी गतिविधियों को बाहर रखा गया है, बशर्ते कि वे दुर्भावनापूर्ण धोखे या महत्वपूर्ण नुकसान का कारण न बनें।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और निवेशकों पर असर
यह बिल टेक्नोलॉजी कंपनियों की जवाबदेही पर बढ़ते फोकस को दर्शाता है। जो प्लेटफॉर्म्स यूज़र-जनित कंटेंट होस्ट करते हैं, उन पर गलत या अनधिकृत AI रिप्रेजेंटेशन की रिपोर्ट मिलने पर तुरंत कार्रवाई करके उसे हटाने की सख्त ज़िम्मेदारी होगी। निवेशकों के लिए, यह नियामक माहौल में एक बदलाव का संकेत है, जहाँ कंप्लायंस (compliance) की लागत बढ़ सकती है। टेक कंपनियों को इन उभरते कानूनी मानकों को पूरा करने के लिए मजबूत डिटेक्शन टूल्स और कंटेंट मॉडरेशन टीमों में अधिक निवेश करना पड़ सकता है।
यह बिल फरवरी 2026 में लागू हुए IT Rules, 2021 के संशोधनों पर आधारित है। उन संशोधनों के तहत AI-जनित कंटेंट को लेबल करना और प्लेटफॉर्म्स के लिए अवैध डीपफेक को हटाने की समय-सीमा तय करना पहले से ही अनिवार्य था। इस नए बिल को पेश करके, सरकार यह संकेत दे रही है कि मौजूदा नियमों को AI के माध्यम से पहचान की चोरी के खिलाफ अधिक विशिष्ट आपराधिक और नागरिक सुरक्षा उपायों से पूरक किया जा सकता है।
निवेशकों को यह देखना चाहिए कि डिजिटल और सोशल मीडिया कंपनियां इन आवश्यकताओं को संभालने के लिए अपनी आंतरिक प्रणालियों को कैसे समायोजित करती हैं। आगे की निगरानी के लिए, संसद सत्र में इस बिल की प्रगति पर ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि यह आने वाले महीनों में टेक्नोलॉजी फर्मों को प्रबंधित करने के लिए सटीक कंप्लायंस मानकों और देनदारियों को स्पष्ट करेगा।
