बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद के 2026 बैच के छात्रों के एडवोकेट के तौर पर एनरोलमेंट पर तत्काल रोक लगा दी है। यह फैसला छात्रों द्वारा चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत को कनवोकेशन समारोह में बुलाए जाने के खिलाफ किए गए विरोध प्रदर्शन के बाद आया है।
क्या है पूरा विवाद?
BCI ने सभी स्टेट बार काउंसिल्स को निर्देश दिया है कि वे NALSAR यूनिवर्सिटी के 2026 बैच के छात्रों को वकील के रूप में एनरोल न करें। यह आदेश 13 अगस्त, 2026 को जारी किया गया। मामला तब गर्माया जब छात्रों के एक बड़े समूह ने विश्वविद्यालय के आगामी कनवोकेशन समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर CJI सूर्यकांत को आमंत्रित करने का विरोध किया।
छात्रों की क्या है मांग?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2026 बैच के 450 से अधिक छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने CJI की हालिया न्यायिक टिप्पणियों, खासकर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई से संबंधित मामलों की सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणियों पर चिंता जताई थी। छात्रों का तर्क था कि यह निमंत्रण संवैधानिक अधिकारों और न्याय तक पहुंच जैसे मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
BCI का एक्शन और आगे क्या?
छात्रों के इस विरोध के जवाब में, BCI ने NALSAR के वाइस-चांसलर से तीन दिनों के भीतर, यानी 16 अगस्त, 2026 तक, एक तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। इस रिपोर्ट में विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों, फैकल्टी और एलुमनाई की पहचान करने को कहा गया है। BCI के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के नेतृत्व में काउंसिल ने कहा है कि यह जानकारी अनुशासनात्मक कार्रवाई की अगली दिशा तय करने के लिए जरूरी है। एनरोलमेंट पर लगी रोक को जारी रखा जाए, हटाया जाए या संशोधित किया जाए, इस पर अंतिम फैसला 19 अगस्त, 2026 को लिया जाएगा।
इस आदेश से प्रभावित होने वाले छात्रों में तत्काल अनिश्चितता का माहौल है, जिनमें से कई कानूनी पेशे में अपने करियर की शुरुआत करने की तैयारी कर रहे थे। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि BCI के इस निर्देश पर सवाल उठ सकते हैं, और यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या एनरोलमेंट के अधिकारों पर ऐसी रोक को कानूनी या संवैधानिक रूप से चुनौती दी जा सकती है।
यह घटना न केवल छात्रों के करियर पर असर डालेगी, बल्कि कैंपस के आंतरिक समीकरणों पर भी प्रकाश डालती है, जिससे स्टाफ और छात्रों के बीच मतभेद बढ़ने की खबरें हैं। संस्थान के लिए चुनौती यह है कि वह अपने प्रशासनिक स्वायत्तता और बार काउंसिल के नियामक निरीक्षण के बीच संतुलन कैसे बनाए रखता है। फिलहाल, सभी की निगाहें 16 अगस्त को रिपोर्ट जमा होने और 19 अगस्त को BCI द्वारा लिए जाने वाले फैसले पर टिकी हैं।
