भारत को झटका! ऑस्ट्रेलिया कोर्ट ने 'Basmati' ट्रेडमार्क की अपील खारिज की

LAWCOURT
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
भारत को झटका! ऑस्ट्रेलिया कोर्ट ने 'Basmati' ट्रेडमार्क की अपील खारिज की

भारत की कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) को ऑस्ट्रेलिया में एक बड़ा झटका लगा है। ऑस्ट्रेलिया के फेडरल कोर्ट ने 'Basmati' को एक एकल शब्द सर्टिफिकेशन मार्क के रूप में पंजीकृत करने की APEDA की अपील को खारिज कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि यह शब्द सिर्फ भारतीय सामानों के लिए खास नहीं है, बल्कि यह एक सामान्य विवरण है।

ऑस्ट्रेलिया के फेडरल कोर्ट ने APEDA की उस अपील को ठुकरा दिया है जिसमें 'Basmati' शब्द को सर्टिफिकेशन ट्रेडमार्क के तौर पर रजिस्टर कराने की मांग की गई थी। 12 अगस्त 2026 के फैसले में कोर्ट ने पिछली सुनवाई के फैसले को बरकरार रखा है। कोर्ट का मानना है कि 'Basmati' शब्द उन सामानों को APEDA द्वारा प्रमाणित सामानों से अलग नहीं करता है, खासकर पाकिस्तान जैसे अन्य देशों में भी बासमती चावल का उत्पादन होता है।

कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि 'Basmati' भारत और पाकिस्तान दोनों में उगाए जाने वाले चावल की एक किस्म का सामान्य विवरण (descriptive term) है। ऑस्ट्रेलियाई ट्रेडमार्क कानून के तहत, एक सर्टिफिकेशन मार्क को प्रमाणित माल को गैर-प्रमाणित माल से अलग करने में सक्षम होना चाहिए। चूँकि यह शब्द अनाज की किस्म के विवरण के रूप में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है, इसलिए कोर्ट ने पाया कि इसे किसी एक प्राधिकरण द्वारा विशेष अधिकार (monopolize) के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इससे पहले भी भारत को न्यूजीलैंड और केन्या जैसे देशों में इसी तरह की कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, जहाँ 'Basmati' नाम पर विशेष अधिकार हासिल करने के प्रयास असफल रहे हैं।

भारतीय चावल निर्यातकों, जिनमें KRBL और LT Foods जैसी प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियां शामिल हैं, के लिए यह एक महत्वपूर्ण डेवलपमेंट है जो उनकी अंतर्राष्ट्रीय ब्रांडिंग रणनीति को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, यह भारत से ऑस्ट्रेलिया को बासमती चावल के निर्यात को नहीं रोकता है, न ही कंपनियों को अपने उत्पाद बेचने की क्षमता को प्रभावित करता है। लेकिन इसका मतलब यह है कि भारतीय निर्यातक प्रतिस्पर्धियों को 'Basmati' नाम का उपयोग करने से नहीं रोक सकते, बशर्ते कि चावल उत्पाद श्रेणी के आवश्यक मानकों को पूरा करता हो। ऑस्ट्रेलियाई बाज़ार में प्रतिस्पर्धा मुख्य रूप से उत्पाद की गुणवत्ता, ब्रांड वफादारी और स्थापित वितरण नेटवर्क जैसे कारकों से तय होगी, न कि नाम पर कानूनी विशेष अधिकार से।

व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि यह चुनौती उन कृषि उत्पादों के लिए भौगोलिक संकेत (GI) की सुरक्षा की जटिल प्रकृति को दर्शाती है जिनकी खेती कई देशों में होती है। भले ही भारत बासमती चावल का एक प्रमुख निर्यातक है, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय कानूनी माहौल अक्सर ऐसे नामों को देश-विशिष्ट ट्रेडमार्क के बजाय सामान्य विवरण के रूप में देखता है।

भविष्य को देखते हुए, भारतीय चावल उद्योग में हितधारक सीधे नाम के कानूनी प्रमाणन पर भरोसा करने के बजाय, ब्रांड-विशिष्ट पहचान को मजबूत करने और भारतीय-उगाए बासमती की अनूठी गुणवत्ता मानकों को उजागर करने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। उद्योग वैश्विक GI रणनीति को लेकर किसी भी आगे की नीति या कानूनी अपडेट पर नजर रखेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.