Assam Jatiya Parishad ने 2026 विधानसभा चुनाव के परिणामों को चुनौती दी है। पार्टी ने Election Commission of India के अधिकारियों के बीच आंतरिक मतभेदों और वोटर लिस्ट मैनेजमेंट में गड़बड़ी का दावा किया है।
चुनावी नतीजों पर खड़ा हुआ विवाद
Assam Jatiya Parishad (AJP) ने आधिकारिक तौर पर 2026 के विधानसभा चुनाव परिणामों को चुनौती देते हुए पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी के अध्यक्ष लुरिनज्योति गोगोई के नेतृत्व में AJP ने दावा किया है कि BJP समर्थित NDA की जीत जनता के स्पष्ट जनादेश के बजाय इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम के कारण हुई है। पार्टी का कहना है कि यह लड़ाई केवल एक राजनीतिक चुनौती नहीं, बल्कि संस्थागत जवाबदेही की मांग है।
ECI के भीतर आंतरिक कलह के दावे
विपक्ष के इस विरोध का मुख्य केंद्र Election Commission of India (ECI) के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच कथित आंतरिक मतभेद हैं। AJP का आरोप है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर कई आपत्तियां दर्ज कराई थीं। ये आपत्तियां मुख्य रूप से वोटर लिस्ट के प्रबंधन, वोटरों के नाम हटाने-जोड़ने और महत्वपूर्ण IT इंफ्रास्ट्रक्चर व डेटाबेस सिस्टम की निगरानी से जुड़ी हुई थीं।
सुधार की मांग और पेपर बैलेट की वकालत
पार्टी ने इन गंभीर आरोपों पर ECI से सार्वजनिक स्पष्टीकरण मांगा है। उनका तर्क है कि संस्था के भीतर चल रही यह खींचतान लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता के विश्वास को कमजोर करती है। अपनी मांगों को आगे बढ़ाते हुए AJP ने अब चुनावी सिस्टम में बड़े बदलाव की वकालत की है और फिर से पेपर बैलेट से चुनाव कराने का मुद्दा उठाया है।
गवर्नेंस और निवेशकों पर प्रभाव
बाजार और गवर्नेंस के नजरिए से देखें तो किसी भी राज्य में संस्थागत पारदर्शिता निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए बेहद अहम होती है। हालांकि यह पूरी तरह से प्रशासनिक मामला है, लेकिन मार्केट पार्टिसिपेंट्स चुनावी विवादों पर बारीकी से नजर रखते हैं ताकि राज्य में भविष्य की पॉलिसी और स्थिरता का अंदाजा लगाया जा सके। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ECI इन आरोपों का औपचारिक जवाब देता है और सरकार चुनावी पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों को कैसे सुलझाती है।
