Allahabad High Court: UP के प्रमुख सचिव पर चला अवमानना का चाबुक, बकाया सैलरी और पेंशन पर सख्त रुख

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Allahabad High Court: UP के प्रमुख सचिव पर चला अवमानना का चाबुक, बकाया सैलरी और पेंशन पर सख्त रुख

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने सैलरी और पेंशन बकाये को लेकर जारी 2022 के आदेश का पालन न करने पर UP के प्रमुख सचिव अजय चौहान के खिलाफ औपचारिक रूप से अवमानना (Contempt) के आरोप तय कर दिए हैं।

सरकारी कर्मचारियों के कंपनसेशन से जुड़े विवाद में लखनऊ बेंच ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। 13 अक्टूबर 2026 को कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पीडब्ल्यूडी (PWD) प्रमुख सचिव अजय चौहान के खिलाफ अवमानना के आरोप तय किए। यह मामला मुख्य रूप से सैलरी फिक्सेशन, बकाया भुगतान और पेंशन लाभों को लागू न करने से जुड़ा है।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद 'सुरेश चंद्र वर्मा' केस से शुरू हुआ, जिसमें कोर्ट ने 2022 में आदेश दिया था। हैरानी की बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जनवरी 2026 में इस फैसले पर मुहर लगाने के बाद भी राज्य सरकार ने अब तक भुगतान नहीं किया है। कोर्ट ने सरकार की तरफ से मांगी गई मोहलत को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि अब देरी के लिए कोई जगह नहीं बची है।

अधिकारियों पर शिकंजा

यह सख्ती केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं है। इससे पहले कोर्ट ने फाइनेंस विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार, अनुराग श्रीवास्तव, अनिल गर्ग और सौरभ बाबू जैसे वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों पर भी अवमानना के आरोप तय किए थे। कोर्ट ने इसे प्रशासनिक लापरवाही करार दिया है।

सरकारी खजाने पर बढ़ेगा बोझ

कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया है कि बकाया राशि पर 7% का सिंपल इंटरेस्ट भी देना होगा, जिससे राज्य के खजाने पर वित्तीय बोझ बढ़ना तय है। फिलहाल अधिकारियों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर 2026 को होगी, जिसमें संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होना होगा।

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