इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें Gonda में जारी रोड टेंडर को अचानक रद्द कर दिया गया था। कोर्ट ने प्रोजेक्ट को एक विभाग से दूसरे विभाग में शिफ्ट करने के आधार पर सवाल उठाए हैं और टेंडर प्रक्रिया को **25 नवंबर, 2026** तक के लिए फ्रीज कर दिया है।
कोर्ट ने क्यों लिया यह फैसला?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 31 जुलाई, 2026 के उस सरकारी आदेश पर रोक लगा दी है, जिसके जरिए Gonda में मऊ समसाबाद अचल नगर रोड प्रोजेक्ट के टेंडर को रद्द करने की कोशिश की गई थी। यह प्रोजेक्ट पहले पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) के अधीन था, जिसे बाद में रूरल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट को सौंपने का प्रयास किया गया था।
जस्टिस आलोक माथे और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की बेंच ने साफ कहा है कि बिना किसी ठोस कारण के सरकारी प्रक्रिया को बीच में रोकना गलत है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता और तर्कसंगत होना बेहद जरूरी है ताकि बोली लगाने वालों (bidders) के हितों पर कोई आंच न आए।
इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर असर
इस फैसले ने इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में एक बड़ी बहस छेड़ दी है। कोर्ट के इस दखल के बाद 25 नवंबर, 2026 तक इस प्रोजेक्ट के लिए कोई नया कॉन्ट्रैक्ट नहीं दिया जा सकेगा। यह फैसला सरकारी टेंडर्स में होने वाले मनमाने बदलावों के खिलाफ एक बड़ा संकेत है।
आगे क्या होगा?
कोर्ट ने राज्य सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 3 हफ्ते का समय दिया है। सरकार को यह बताना होगा कि आखिर किस आधार पर इस प्रोजेक्ट का अधिकार क्षेत्र (jurisdiction) बदला गया था। फिलहाल, निवेशकों और संबंधित कॉन्ट्रैक्टर्स के लिए यह मामला कानूनी अनिश्चितता का विषय बना हुआ है, क्योंकि इससे प्रोजेक्ट की समयसीमा प्रभावित हो सकती है।
