इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सांसदों और विधायकों से जुड़े आपराधिक मुकदमों की मॉनिटरिंग के लिए डिजिटल सिस्टम को अपग्रेड करने का आदेश दिया है। अब कलर-कोडेड ट्रैकिंग और ऑटोमेटेड ऑडिट से सुनवाई में होने वाली देरी पर लगाम लगेगी।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सांसदों (MPs) और विधायकों (MLAs) से जुड़े आपराधिक मामलों की सुनवाई को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की बेंच ने पाया कि प्रशासनिक खामियों के कारण इन हाई-प्रोफाइल केसों में लगातार देरी हो रही थी। कई बार केस गलत बेंच को अलॉट किए जा रहे थे या उनकी लिस्टिंग में गड़बड़ी पाई गई, जिससे न्यायिक प्रक्रिया सुस्त पड़ गई थी।
डिजिटल ट्रैकिंग के नए मानक
इन बाधाओं को दूर करने के लिए हाई कोर्ट ने अपने केस मैनेजमेंट पोर्टल में बड़े बदलाव करने को कहा है। अब सिस्टम में कलर-कोडेड ट्रैकिंग लागू होगी, जिससे मुकदमों की प्रगति पर रीयल-टाइम नजर रखी जा सकेगी। इसके अलावा, ट्रायल कोर्ट्स को अब पोर्टल पर ड्रॉप-डाउन मेन्यू का इस्तेमाल करना होगा ताकि देरी की ठोस वजह स्पष्ट हो सके। ये फीचर ऑटोमेटेड ऑडिट रिपोर्ट तैयार करेंगे, जिससे सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई समय-सीमा का पालन करना अनिवार्य हो जाएगा।
रिकॉर्ड मैनेजमेंट में सुधार
सॉफ्टवेयर अपडेट के साथ-साथ, कोर्ट ने फिजिकल रिकॉर्ड्स को बेहतर बनाने के निर्देश भी दिए हैं। रजिस्ट्रार (जुडिशियल), क्रिमिनल को तीन हफ्तों के भीतर सभी पेंडिंग ट्रायल का स्टेटस चार्ट जमा करना होगा। यह डेटा बेंच को मुकदमों की बारीकी से निगरानी करने में मदद करेगा। इन सुधारों का असर 6 नवंबर, 2026 को होने वाली अगली सुनवाई के दौरान देखा जाएगा, जो यह तय करेगा कि इन जरूरी कानूनी सुधारों का कितना असर जमीन पर दिख रहा है।
