इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षकों के लिए अनिवार्य क्रेडेंशियल ऑडिट के आदेश दिए हैं। फर्जी दस्तावेजों के मामलों के बाद, शिक्षकों को एक हफ्ते के भीतर अपने शैक्षणिक प्रमाण पत्र बेसिक शिक्षा अधिकारी को जमा करने होंगे, जिसकी निगरानी स्पेशल टास्क फोर्स (STF) करेगी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के कक्षा 1 से 8 तक के सभी स्कूलों में शिक्षकों के शैक्षणिक दस्तावेजों के सत्यापन के लिए राज्यव्यापी निर्देश जारी किए हैं। जस्टिस विनोद दिवाकर ने यह आदेश तब दिए जब जांच में सामने आया कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए बड़ी संख्या में नियुक्तियां की गई हैं, जहां कई व्यक्तियों ने एक ही प्रमाण पत्र का इस्तेमाल कर नौकरी हासिल की।
क्या करना होगा शिक्षकों को?
सभी शिक्षकों को अपने नियुक्ति पत्र और शैक्षणिक दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां 7 दिनों के भीतर अपने संबंधित बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय में जमा करनी होंगी। साथ ही, शिक्षकों को एक नोटरी शपथ पत्र भी देना होगा, जिसमें यह खुलासा करना होगा कि क्या उनका कोई करीबी रिश्तेदार बेसिक शिक्षा अधिकारी या उससे ऊपर के पद पर कार्यरत है या रहा है।
STF की सीधी निगरानी
इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी राज्य शिक्षा निदेशालय और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) मिलकर करेंगे। कोर्ट ने साफ किया है कि यह कदम स्कूलों में घटती छात्र संख्या और गिरते शैक्षणिक मानकों को सुधारने के लिए उठाया गया है, क्योंकि खराब भर्ती प्रक्रिया का सीधा असर शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहा है।
यह निर्देश गोरखपुर के एक मामले के बाद आया है, जहां एक शिक्षक दूसरे की पहचान का उपयोग करते हुए पकड़ा गया था। कोर्ट ने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को भी कड़ी चेतावनी दी है और मामले की अगली समीक्षा 4 नवंबर, 2026 को तय की है।
