Allahabad HC का बड़ा फैसला: रिटायर शिक्षकों को मिलेगी ग्रेच्युटी, 6% ब्याज का भी आदेश

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AuthorMehul Desai|Published at:
Allahabad HC का बड़ा फैसला: रिटायर शिक्षकों को मिलेगी ग्रेच्युटी, 6% ब्याज का भी आदेश

Allahabad High Court ने एक अहम फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि 60 साल की उम्र के बाद काम करने वाले शिक्षकों को ग्रेच्युटी (Gratuity) से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने संस्थान को **6%** सालाना ब्याज के साथ बकाया भुगतान करने का आदेश दिया है।

विवाद की जड़ और कोर्ट का रुख

यह मामला श्रीमती रईसा खान नाम की एक सेवानिवृत्त शिक्षिका से जुड़ा है, जिन्हें 62 साल की उम्र तक सेवा देने के बाद भी ग्रेच्युटी देने से इनकार कर दिया गया था। संस्थान का तर्क था कि उन्होंने 60 साल की मानक रिटायरमेंट उम्र के बाद भी काम जारी रखा, इसलिए वे इस भुगतान की हकदार नहीं हैं।

न्यायमूर्ति इरशाद अली ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि ग्रेच्युटी एक सामाजिक सुरक्षा (Social Security) का जरिया है, जिसे कर्मचारी के अधिकारों के ऊपर नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब संस्थान ने स्वयं शिक्षिका को सेवा विस्तार दिया था, तो बाद में उसी आधार पर भुगतान रोकने का कोई कानूनी अधिकार उनके पास नहीं है।

संस्थानों के लिए सीख

यह फैसला उन सभी संस्थानों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो प्रशासनिक नियमों (Administrative rules) का हवाला देकर कर्मचारियों के कानूनी अधिकारों को दबाते हैं। अब संस्थानों को यह ध्यान रखना होगा कि तकनीकी खामियां या पेपरवर्क का अभाव ग्रेच्युटी जैसे वैधानिक लाभों को रोकने का आधार नहीं बन सकता।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसलों से भविष्य में संस्थानों पर लिटिगेशन (Litigation) का खतरा बढ़ सकता है। यदि कोई संस्थान बिना ठोस आधार के भुगतान रोकता है, तो उसे कोर्ट के आदेश के बाद न केवल मूल राशि, बल्कि 6% सालाना ब्याज और कानूनी खर्च का भी बोझ उठाना पड़ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.