Allahabad High Court ने कस्टोडियल कदाचार को रोकने के लिए सभी पुलिस थानों में 24/7 CCTV निगरानी के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने संदिग्धों की गिरफ्तारी और तकनीकी खराबी की लॉगिंग के लिए सख्त प्रोटोकॉल तय किए हैं, ताकि पुलिस की मनमानी पर लगाम लग सके।
कोर्ट का सख्त रुख
इलाहाबाद हाई कोर्ट की बेंच, जिसमें Justice Atul Sreedharan और Justice Achal Sachdev शामिल थे, ने यह निर्देश रघवेंद्र दुबे मामले की सुनवाई के दौरान दिए। जांच में सामने आया कि पुलिसकर्मी निष्पक्ष कानून लागू करने के बजाय निजी सैंड-माइनिंग विवाद में रिकवरी एजेंट के रूप में काम कर रहे थे। कोर्ट ने गिरफ्तारी को अवैध करार देते हुए पीड़ित को ₹10,000 का हर्जाना देने का आदेश दिया है।
नई गाइलाइंस और प्रोटोकॉल
यह फैसला Supreme Court of India द्वारा 'परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह' मामले में दिए गए निर्देशों को जमीनी स्तर पर मजबूती से लागू करने के लिए आया है। अब सबूतों के साथ छेड़छाड़ को रोकने के लिए नया प्रोटोकॉल लागू किया गया है:
- तकनीकी खराबी (Technical Outages): यदि CCTV सिस्टम खराब होता है, तो स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) को तुरंत जनरल डायरी में एंट्री करनी होगी।
- रिपोर्टिंग: खराबी के समय और उसके लिए जिम्मेदार अधिकारी का नाम जिला पुलिस अधीक्षक को बताना अनिवार्य होगा।
- मैनुअल डॉक्यूमेंटेशन: जब तक कैमरा ठीक नहीं होता, तब तक संदिग्धों की आवाजाही और पूछताछ का विवरण जनरल डायरी में दर्ज करना होगा और परिजनों को इसकी रसीद देनी होगी।
निवेशकों के लिए महत्व
कॉर्पोरेट जगत और निवेशकों के नजरिए से, यह कदम ESG (Environmental, Social, and Governance) के 'गवर्नेंस' पहलू को मजबूत करता है। सार्वजनिक संस्थानों में पारदर्शिता और कानूनी नियमों का पालन व्यापार के लिए एक स्थिर माहौल बनाता है। डिजिटल ऑडिट ट्रेल का बढ़ता चलन भविष्य में मनमानी प्रशासनिक कार्रवाई के जोखिम को कम कर सकता है, जो एक स्वस्थ बिजनेस क्लाइमेट के लिए सकारात्मक है।
