इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने जस्टिस अजय भनोट की कोर्ट का बहिष्कार करने की धमकी दी है। सुनवाई के दौरान हुए एक कथित दुर्व्यवहार के बाद पैदा हुए इस विवाद से पेंडिंग पड़े कॉर्पोरेट और सिविल मामलों की सुनवाई में देरी का खतरा बढ़ गया है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट में बेंच और बार के बीच तनातनी काफी बढ़ गई है। एसोसिएशन ने जस्टिस अजय भनोट की अदालत का काम काज रोकने (बहिष्कार) का फैसला लिया है। यह विवाद कोर्ट नंबर 49 में पुलिस अधिकारियों के बैठने की व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ, जिसे लेकर वकीलों का कहना है कि वहां का व्यवहार बेहद अनप्रोफेशनल था।\n\nबार एसोसिएशन का आरोप है कि जब एक वकील ने पुलिस अधिकारी को तय सीट पर बैठने को कहा, तो जस्टिस भनोट ने सख्त रवैया अपनाया। आरोप है कि उन्होंने वकील को हिरासत में लेने की धमकी दी और भरी अदालत में माफी मांगने का दबाव बनाया। वकीलों का कहना है कि इस तरह के बर्ताव से कानूनी बिरादरी का सम्मान कम होता है।\n\n### चीफ जस्टिस से हस्तक्षेप की मांग\n\nएसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉ. सीपी उपाध्याय और जनरल सेक्रेटरी संतोष कुमार मिश्रा ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर तुरंत दखल देने की अपील की है। एसोसिएशन का कहना है कि पुलिस और अधिकारियों के लिए मौजूदा सीटिंग प्रोटोकॉल से वकीलों को अपमानित महसूस होता है।\n\n### निवेशकों और कॉर्पोरेट जगत पर असर\n\nअगर आप इलाहाबाद हाई कोर्ट में किसी कानूनी मामले से जुड़े हैं, तो यह खबर आपके लिए चिंताजनक हो सकती है। न्यायिक बहिष्कार के कारण अचानक एडजर्नमेंट (Adjournment) हो सकते हैं, जिससे महत्वपूर्ण कॉर्पोरेट विवाद, इन्सॉल्वेंसी फाइलिंग या रेग्युलेटरी मामलों का निपटारा और लंबा खिंच सकता है। कोर्ट की कार्यप्रणाली में किसी भी तरह की बाधा से पेंडिंग केसों का बैकलाग और बढ़ जाएगा। अब सबकी नजरें चीफ जस्टिस के रुख पर टिकी हैं कि वे इस विवाद को कैसे सुलझाते हैं।
