Allahabad HC: साइबर क्राइम में बैंक अब पूरे खाते फ्रीज नहीं कर सकेंगे, सिर्फ विवादित रकम पर लगेगी रोक

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AuthorMehul Desai|Published at:
Allahabad HC: साइबर क्राइम में बैंक अब पूरे खाते फ्रीज नहीं कर सकेंगे, सिर्फ विवादित रकम पर लगेगी रोक

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने बैंकों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। अब साइबर क्राइम की जांच के दौरान बैंक किसी भी ग्राहक के पूरे खाते को फ्रीज नहीं कर सकेंगे। उन्हें केवल उसी राशि को रोकना होगा जो कथित अपराध से जुड़ी हो।

कोर्ट का बड़ा फैसला, ग्राहकों को मिलेगी राहत

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि बैंक अब साइबर क्राइम के मामलों में ग्राहकों के पूरे बैंक खाते को फ्रीज नहीं कर सकते। यह फैसला जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी खास ट्रांजैक्शन (transaction) को लेकर जांच चल रही है, तो बैंक केवल उसी विवादित राशि को रोक सकते हैं, पूरे खाते को नहीं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहकों के ज़रूरी पैसे फंसे नहीं, खासकर जब मामला किसी छोटी राशि से जुड़ा हो।

व्यवसायी की याचिका पर आया फैसला

यह फैसला एक व्यवसायी, रितेश यादव, की याचिका पर आया, जिनके खातों को साइबर क्राइम की जांच के बाद ब्लॉक कर दिया गया था। कोर्ट ने बंधन बैंक, आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) और एक्सिस बैंक (Axis Bank) को निर्देश दिया कि वे खाते को डी-फ्रीज (de-freeze) करें और केवल ₹36,000 की विवादित राशि पर ही रोक लगाएं। यह एक मिसाल कायम करता है कि बैंकों को अब जांच के दायरे में आने वाली छोटी या विवादित राशि पर ही रोक लगानी होगी, न कि पूरे खाते पर।

बैंकिंग सेक्टर पर असर

इस फैसले से बैंकिंग सेक्टर में नियमों का पालन करने के तरीके में बदलाव आएगा। अब बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि खाते पर लगाई गई रोक, कथित अपराध से प्राप्त राशि के अनुपात में ही हो। इसके लिए, जांच अधिकारियों को बैंक को FIR की कॉपी और रोकी जाने वाली सटीक राशि का ब्योरा देना होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि किसी छोटे या असंबंधित विवाद के कारण खाताधारकों को अपने ही पैसे इस्तेमाल करने से वंचित न रहना पड़े।

गृह मंत्रालय के दिशानिर्देशों का पालन

यह फैसला गृह मंत्रालय (MHA) के राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के ज़रिए शिकायतों के समाधान के लिए निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure) के अनुरूप है। कोर्ट को उम्मीद है कि बैंक इन दिशानिर्देशों का पालन करते हुए खाताधारकों को समयबद्ध समाधान प्रदान करेंगे। बैंकों के लिए, इसका मतलब है कि उन्हें अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं को बेहतर बनाना होगा ताकि इन 'सर्जिकल फ्रीज' (surgical freeze) को सटीकता से लागू किया जा सके। इसमें अतिरिक्त प्रशासनिक और अनुपालन का बोझ बढ़ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.