अहमदाबाद पुलिस का बड़ा खुलासा: चीन-पाकिस्तान से जुड़े 'बॉस स्कैम' रैकेट का भंडाफोड़!

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AuthorAditya Rao|Published at:
अहमदाबाद पुलिस का बड़ा खुलासा: चीन-पाकिस्तान से जुड़े 'बॉस स्कैम' रैकेट का भंडाफोड़!

अहमदाबाद साइबर क्राइम की टीम ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी रैकेट का पर्दाफाश किया है। यह 'साइबरक्राइम-एज-ए-सर्विस' (CaaS) मॉडल चीन के मैलवेयर और पाकिस्तान के कॉल सेंटरों से जुड़ा था, जो भारतीय कंपनियों को निशाना बना रहा था।

1.5 करोड़ की 'बॉस स्कैम' का मास्टरमाइंड?

साइबर क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया है कि यह रैकेट 'बॉस स्कैम' के जरिए कॉर्पोरेट गवर्नेंस और वित्तीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रहा था। जांच का केंद्र ₹1.5 करोड़ की 'बॉस स्कैम' धोखाधड़ी थी। पता चला कि इस रैकेट में चीन में डेवलप किए गए मैलवेयर और पाकिस्तान से संचालित कॉल सेंटर का इस्तेमाल हो रहा था।

पश्चिम बंगाल से जुड़े दो गिरफ्तार

पुलिस ने पश्चिम बंगाल से दो ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन पर इस स्कैम के लिए टेक्निकल सपोर्ट देने का आरोप है। जांच में 4,500 से ज्यादा सिम कार्ड और हजारों डिवाइस जब्त किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा था। इस रैकेट का जाल इतना बड़ा है कि देश के 26 राज्यों में 251 से ज्यादा शिकायतें नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज हो चुकी हैं।

'बॉस स्कैम' कैसे काम करता था?

यह रैकेट 'बॉस स्कैम' को अंजाम देता था, जिसमें धोखेबाज किसी कंपनी के सीनियर एग्जीक्यूटिव्स, जैसे CEO या CFO का रूप धारण कर कर्मचारियों को फंसाते थे। इसके बाद उनसे पैसों का ट्रांसफर या संवेदनशील डेटा मांगा जाता था। हैकर्स WhatsApp Web सेशन को मैलवेयर से हैक करके बातचीत पर नजर रखते थे और फिर लीडरशिप की तरफ से तत्काल ट्रांसफर का मैसेज भेजते थे, जिसे कर्मचारी असली मान लेते थे।

कंपनियों के लिए बड़ा सबक

यह मामला निवेशकों और कॉर्पोरेट जगत के लिए एक चेतावनी है। यह दिखाता है कि साइबर फ्रॉड करने वाले पेशेवर और संगठित तरीके से अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। भले ही यह स्कैम किसी एक लिस्टेड कंपनी को सीधे तौर पर निशाना नहीं बना रहा था, लेकिन यह स्पष्ट करता है कि अगर कंपनियों के पास मजबूत इंटरनल फाइनेंशियल कंट्रोल और ट्रांजेक्शन के लिए मल्टी-स्टेप वेरिफिकेशन प्रोसेस नहीं है, तो वे भी खतरे में हैं।

आगे क्या?

इंडियन साइबरक्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) इन अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट्स पर कार्रवाई कर रहा है। कंपनियों को अपनी साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल को फिर से जांचने की सलाह दी गई है। शेयरधारकों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या कंपनी के इंटरनल कंट्रोल सिस्टम ऐसे फ्रॉड को रोकने में सक्षम हैं। आगे I4C की कोशिश यह पता लगाने की होगी कि ये गलत पैसा कहां गया और बाकी का इंफ्रास्ट्रक्चर कैसे तोड़ा जाए। निवेशक और मैनेजमेंट डिजिटल ट्रांजेक्शन सिक्योरिटी पर बढ़ते रेगुलेटरी फोकस और ऐसे हमलों से कंपनियों को बचाने के लिए नई गाइडलाइंस की उम्मीद कर सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.