बाजार में गिरावट के बावजूद IPO का जलवा बरकरार है। Zerodha के CEO Nithin Kamath ने बताया कि कैसे नई लिस्टिंग मौजूदा बाजार से बिल्कुल अलग चाल चल रही हैं और निवेशकों के लिए इसमें क्या खतरे हो सकते हैं।
भारतीय शेयर बाजार में इन दिनों एक अजीब स्थिति देखने को मिल रही है। एक तरफ जहां सेकेंडरी मार्केट में बिकवाली हावी है, वहीं दूसरी तरफ नए IPO शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। Zerodha के CEO Nithin Kamath के मुताबिक, यह गैप ऐतिहासिक रूप से काफी दुर्लभ है।
आंकड़ों में समझें खेल
अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 के बीच मेनबोर्ड पर 125 कंपनियों की लिस्टिंग हुई। डेटा के मुताबिक, इन कंपनियों में से 67.2% अभी भी अपने इश्यू प्राइस से ऊपर ट्रेड कर रही हैं। इन नई लिस्टिंग्स ने 24.7% का मीडियन रिटर्न दिया है। यह स्थिति पिछले साल यानी अक्टूबर 2024 से सितंबर 2025 के मुकाबले बिल्कुल उलट है, जब आधी से कम कंपनियां अपने इश्यू प्राइस के ऊपर थीं और मीडियन रिटर्न -9.4% रहा था।
क्या है असली खतरा?
Kamath का मानना है कि बाजार में लिक्विडिटी का प्रवाह बना हुआ है, जबकि मार्केट सेंटीमेंट 'बेयरिश' है। Nifty 50 समेत मुख्य इंडेक्स अपने पीक से नीचे संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन निवेशकों का रुझान IPO की तरफ जबरदस्त बना हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह 'froth' यानी बाजार के अत्यधिक गर्म होने का संकेत हो सकता है। अगर ग्लोबल और लोकल फैक्टर्स का दबाव बना रहा, तो IPOs में दिख रही यह जोश भरी तेजी धड़ाम भी हो सकती है। निवेशकों को सलाह है कि वे केवल सेंटीमेंट के आधार पर नहीं, बल्कि कंपनियों के फंडामेंटल्स और तिमाही नतीजों पर नजर रखें, क्योंकि खराब परफॉर्मेंस की स्थिति में इन नए स्टॉक्स में गिरावट पुरानी कंपनियों के मुकाबले ज्यादा तेज हो सकती है।
