Vaibhav Vyapaar IPO: प्राइस बैंड ₹50-52 तय, 13 अक्टूबर से खुलेगा निवेश का मौका

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AuthorAditya Rao|Published at:
Vaibhav Vyapaar IPO: प्राइस बैंड ₹50-52 तय, 13 अक्टूबर से खुलेगा निवेश का मौका

LoanFront डिजिटल लेंडिंग ऐप चलाने वाली कंपनी Vaibhav Vyapaar ने अपने **₹40.54 करोड़** के SME IPO के लिए **₹50-52** का प्राइस बैंड तय कर दिया है। निवेशक **13 अक्टूबर 2026** से इस इश्यू में पैसा लगा सकेंगे।

Vaibhav Vyapaar, जो मुख्य रूप से LoanFront ब्रांड के तहत डिजिटल पर्सनल लोन मुहैया कराती है, अब शेयर बाजार में कदम रखने के लिए पूरी तरह तैयार है। कंपनी ने अपने IPO के लिए ₹50 से ₹52 प्रति शेयर का प्राइस बैंड रखा है। इस फ्रेश इश्यू के जरिए कंपनी ₹40.54 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है, जिसका इस्तेमाल भविष्य के लेंडिंग ऑपरेशंस के लिए कैपिटल बेस को मजबूत करने में किया जाएगा।

सब्सक्रिप्शन और लिस्टिंग

निवेशकों के लिए यह विंडो 13 अक्टूबर 2026 को खुलेगी और 15 अक्टूबर 2026 तक खुली रहेगी। सफल सब्सक्रिप्शन के बाद, शेयरों की लिस्टिंग 21 अक्टूबर 2026 को NSE Emerge प्लेटफॉर्म पर होगी। SME IPO होने के कारण, निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि यहाँ लिक्विडिटी मुख्य बोर्ड एक्सचेंज के मुकाबले कम हो सकती है।

बिजनेस मॉडल और फाइनेंशियल हेल्थ

साल 2009 में शुरू हुई और 2010 में RBI से लाइसेंस प्राप्त यह NBFC कंपनी सैलरीड और सेल्फ-एम्प्लॉयड व्यक्तियों को अनसिक्योर्ड पर्सनल लोन देती है। कंपनी की फाइनेंशियल स्थिति में सुधार देखा गया है। फाइनेंशियल ईयर मार्च 2026 में कंपनी ने ₹36.8 करोड़ के रेवेन्यू पर ₹1.97 करोड़ का मुनाफा कमाया था। वहीं, चालू फाइनेंशियल ईयर के शुरुआती 4 महीनों (जुलाई 2026 तक) में कंपनी ₹3 करोड़ का मुनाफा दर्ज कर चुकी है, जो कि रेवेन्यू ₹18 करोड़ रहा है।

जोखिम और चुनौतियां

निवेश करने से पहले कुछ जरूरी बातों पर गौर करना बेहद जरूरी है:

  • जियोग्राफिक कंसंट्रेशन: कंपनी का लोन पोर्टफोलियो मुख्य रूप से दक्षिण भारत के कुछ राज्यों तक सीमित है, जो इसे क्षेत्रीय आर्थिक मंदी या स्थानीय नियमों के प्रति संवेदनशील बनाता है।
  • क्लाइंट बेस: कंपनी के कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में 80% हिस्सेदारी पुराने (रिपीट) ग्राहकों की है। अगर इन ग्राहकों का व्यवहार बदलता है, तो कंपनी के कारोबार पर असर पड़ सकता है।
  • रेगुलेटरी रिस्क: डिजिटल लेंडर होने के नाते, RBI के नियमों में कोई भी बदलाव कंपनी के अनुपालन खर्च (Compliance cost) को बढ़ा सकता है। इसके अलावा, ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव भी कंपनी के मार्जिन को प्रभावित कर सकता है।
Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.